Sunday, 17 November 2013

ये बिल्कुल ही सच्ची कहानी है मेरी चचेरी बहनगांव से अपनी पढ़ाई के लिए हम लोगो के पासशहर मे आई थी। उस समय वो इंटर मे दाख़िलेके लिये आई थी और मैं ग्रेजुएशन मे था। हमलोग शुरू से शहर में रहते थे। मेरेपिताजी सरकारी नौकरी मे थे। मैं घर मे सबसेछोटा हूँ। मेरी बहन मुझसे छोटी थी क़रीब 5साल की थी। शुरू मे तो ऐसा कोई ख़्यालनही आया, मगर धीरे धीरे मन सेक्स की तरफ़होने लगा। हम लोगो का कमरा छोटा था औरहमलोग सब एक ही बेड पर सोते थे। मैं अक्सरअपनी बहन के बगल मे सोया करता था। रात मेसोते समय मेरे हाथ उसके पेट को छूते थे। मुझेतो आकर्षण महसूस होता था मगर उसके बारेमे मुझे कुछ पता नही चल पाता था।एक दिन मैंने उसके स्तन को छुआ तो उसनेथोड़ा विरोध किया मैंने तुरत अपना हाथहटा लिया। फिर मैंने एक बार कोशिश की लेकिनफिर से हटा दिया मगर कुछ बोला नही मुझेभी डर लग रहा था क्योंकि मेरी मा औरमेरी अपनी दोनो बहन भी बगल मे सोई हुई थी।दूसरे दिन मैंने फिर से कोशिश की इस बार मैंनेउसके स्तन को तोड़ा ज़ोर से प्रेस किया इसबार उसकी थोड़ी सहमति थी मैंने धीरे धीरेकाफ़ी देर तक प्रेस किया शायद उसे भी आनंदआ रहा था। ये कार्यक्रम काफ़ी दिनो तकचला। एक दिन उसने मुझसे पूछा की आपऐसा क्यों करते है तो मैंने बोला की क्यों तुम्हेपसंद नही है तो उसने कहा नही ऐसी कोई बातनही मगर किसी को पता चलेगा तो क्या होगा।तब मैंने कहा किसी को पता नही चलेगा। तुमसाथ दो तो कुछ नही होगा। फिर उसनेहामी भरी। अब हम लोग घर मे किसी केनही रहने का इंतज़ार करने लगे और येमौक़ा भी हमे जल्द ही मिल गया और मैंनेकहा की अब मैं कुछ और टेस्ट करना चाहता हूँ।तो उसने पूछा क्या तो मैंने कहा, मैंतुम्हरा स्तन देखना चाहता हूँ उसने पहलेतो मना किया फिर थोड़ी देर मे हामी भरदी तो मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया और फिरमैंने धीरे से से उसके सलवार को उपरकिया और उसके ब्रा को उपरकिया तो देखा की दो गोल गोल स्तन मेरे सामनेथे जो की मैंने पहले कभी नही देखा था और फिरमैंने अपने दोनो हाथों से उसको दबाना शुरू करदिया शायद उसे भी अच्छा लग रहा था औरवो ज़्यादा ही उत्तेजित हो रही थी। फिरकाफ़ी दिनों तक चलता रहा मगर असली प्यासअभी नही बुझी थी और मेरा मन उसको चोदनेको करने लगा।एक दिन मैंने कहा की ये सबकाफ़ी हो गया क्यों ना ज़िंदगी की असली मज़ा लिया जाएतो उसने कहा - क्या ? तो मैंनेकहा ज़िंदगी की सुख तो चुदाई मे ही हैं जो कि हरआदमी और औरत की ज़रूरत है। तब उसनेकहा इसमे कोई रिस्क तो नही है ?मैंने कहा- नहीं, सावधानी के साथ करेंगे। मगरपता नही उसे काफ़ी डर लग रहा था औरहिम्मत नही जुटा पा रही थी। काफ़ी समझाने केबाद उसे विश्वास हो गया और उसने हामी भरदी और हमलोग एकांत का इंतेज़ार करने लगेऔर एक दिन हमे मौक़ा मिल गया जबमेरी मां और बहन बाज़ार गये और हम दोनो घरमे अकेले थे तब मैंनेकहा क्यों ना अपनी ज़िंदगी की प्यासभुझा ले।।उसने दबी ज़ुबान मे हां कही और फिर मैंने धीरेधीरे उसके सलवार औरपायजामा को खोला अब वो ब्रा और पेण्टी मेमेरे सामने थी उसका बदनतो मानो अप्सरा का बदन लग रहा था औरशर्मा रही थी और अपने चेहरेको अपनी हाथों से ढके हुई थी फिर मैंने धीरे सेअपने कपड़े को उतारा और उसके स्तन को धीरेधीरे दबाना शुरू किया शायद उसे अच्छा लगरहा था अब मैंने उसके ब्रा को खोल दिया औरमेरे सामने उसके संतरे जैसे दो चीज़ आ गई औरमैंने अपने मुह से उसके स्तन को चूसना शुरूकिया ये अहसास उसे अच्छा लग रहा था औरवो ज़यादा उत्तेजित हो रही थी और मैं भी अबकाफ़ी उत्तेजित होने लगा था।फिर मैंने उसके पेण्टी को उतार दिया अब मेरेसामने मानो जैसे दुनिया की सबसी बड़ी चीज़नज़र आ रही थी क्योंकि अभी तक मैंनेकिसी भी लड़की को ऐसे नही देखा था। अब मैंनेअपने लंड को उसके मुंह मे दे दिया। पहलेतो उसने मना किया काफ़ी मनाने के बादवो मान गई और मेरे लंड को चूसना शुरू करदिया मैं तो मानो की सातवे आसमान मे सफ़रकर रहा था उस अहसास का बयान मैं नही करसकता की मैं कैसा महसूस कर रहा था। उसकेचूसने से मेरा लंड काफ़ी टाईट हो गया और मैंनेइसे उसके बुर मे धीरे धीरे डालना शुरू किया उसेकाफ़ी तकलीफ़ महसूस हो रही थी।पहली बार किसी मर्द के लंड उसके बुर मेजो जा रहा था। मैंने उसकी तकलीफ़ को समझतेहुए धीरे धीरे लंड को अंदर डाला अब तो उसेभी मज़ा आने लगा और थोड़ा ऊऊऊ आआआईईई के आवाज़ के साथवो पूरा मज़ा लेना चाहती थी और मैं भी इसमौक़े को छोड़ना नही चाहता था और हमलोगो नेक़रीब 1 घंटे तकअपनी जवानी का मज़ा लिया लेकिन इसके बादहम दोनों की चाहत बढ़ती गई और हम लोग रातमे भी ये काम सबसे बचते हुए करने लगे और घरमे कोई ना हो तो फिर क्या कहना। इस तरह सेहमलोगो ने क़रीब 7 साल तकअपनी जवानी का मज़ा लेते रहे। अबउसकी शादी हो चुकी है मगर मैंअभी भी कुंवारा हूँ और उन दिनों के बारे मेसोचकर आज भी दिल रोमांचित हो जाता है।

ज़हाज में दीदी की चुदाईबात उन दिनों की है जब मैं कोलकाता में एकआर्ट कॉलेज में पढ़ता था। मेरे साथसंपा दीदी पढ़ती थी जो मुझसे एक सालसीनियर थी।अंडमान आइलैंड से हम दोनों ही थे हमारेकॉलेज में, इस लिए संपा दीदी मुझेअपनी भाई की तरह मानती थी।गर्मियों की छुट्टी शुरू होनेवाली थी तो दीदी ने कहा- संजय चलो इसबार हम दोनों शिप (जहाज) से अंडमानजायेंगे !मैंने कहा - ठीक है दीदी मैं टिकेट ले लूँगा।और फिर हम लोग निर्धारित दिन में जहाज मेंचढ़ गए।कोलकाता से अंडमान आने के लिए ४ दिनलगते है। मैंने एक ही केबिन के टिकेट लिए थे।जहाज में चढ़ कर हमने खिड़की में सेदेखा कि शाम को ५.०० बजे जहाज बन्दर सेछूटा और फिर धीरे धीरेकोलकाता का खिदिरपुर डॉक हमसे दूरहोता जा रहा था। शाम के वक्त लाइट बहुतसुंदर दिख रही थी।तभी दीदी ने कहा- भाई देखो कितनी सुंदरदृश्य नज़र आ रहा है, इस सीन का लैंड स्केपबना सकते है।मैंने भी हाँ में हामी भरी। वक्त कटता गया,शाम के ७.०० बजे डिनर होता है जहाज में,इसलिए हम ७.३० तक डिनर खाकर अपनेकेबिन में आ गए। दीदी ने कहा- संजय ! इसकेबिन में तो चार सीट हैं फिर हम दोनों केअलावा और किसी को इस केबिन का टिकेटनहीं मिला क्या?मैंने कहा- दीदी शायद जहाजखाली जा रहा है, इसलिए जहाज में लोगभी कम नज़र आ रहे हैं।थोड़ी देर की खामोशी के बाद दीदी बोली-भाई इतनी जल्दी तो नींद नहीं आने वाली !चलो कपड़े बदल लेते हैं और फिर हम एकदूसरे के स्केच बनाते हैं। मैंने भी हाँ कहा औरबाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक नेक्कर औरबनियान पहनकर बेड में बैठ गया।दीदी ने कहा- दरवाजा बंद कर दो।और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक स्कर्टऔर हल्का सा टाप पहन कर बाहर आई। मैंदेखता रह गया कि दीदी कितनी सुंदर लगरही हैं, इससे पहले दीदी को कभी इन कपड़ो मेंनहीं देखा था।दीदी को पता चला तो बोली - संजय !क्या देख रहे हो ? तुमको ठीक से मेरी फिगरदिखाई दे इसलिए ही इन कपड़ो को पहना हैताकि तुमको मेरी स्केच बनने कोई परेशानी नहो !फिर हम दोनों एक दूसरे के स्केच बनाने लगे।मेरी नज़र तो बार बार संपा दीदी की छाती परजाकर रुक जाती थी और मेरे लिए अपनेलण्ड को हाफ पैन्ट में छुपाना मेरे लिएमुश्किलहो रहा था क्योंकि दीदी की उभरी हुयी चुंचियाँटॉप के भीतर से झाँकने लगी थी।दीदी को शायद पता चला या नहीं अचानकदीदी ने कहा- भाई क्या हुआ तुमको?क्या देख रहे हो? क्या कुछ दिक्कत हो रही हैस्केच बनाने में या ठीक से दिख नहीं रही हैमेरी फिगर ? चलो तुम्हारे लिए औरथोड़ी एडजस्ट कर लेती हूँ, लकिन तुमभी अपना बनियान उतार कर बैठो, और फिरदीदी ने अपने स्कर्ट और टाप उतार दी।मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी। पर मैंचुपचाप से दीदी की ब्रा में बंद उनके बड़े बड़ेबूब्स को ही देख रहा था।तभी दीदी ने कहा- क्या हुआ संजय?जल्दी से अपनी बनियान उतार दो, मुझेभी तो तुम्हारा स्केच बनाने है। और इस तरहक्या देख रहे हो? ठीक से स्केच बनाओ !मैंने धीरे से अपने बनियान उतार दिया औरफिर स्केच बनने लगा, पर मेरा लण्डको हाफ-पैन्ट में छुप नहीं पा रहा था और मैंइधर उधर देखने लगा। शायददीदी को मेरा लण्ड हाफ-पैन्ट मेंखड़ा होता दिख गया।दीदी ने कहा- संजय ! क्या हुआ ? कभी इसतरह किसी लड़की को नहीं देखा क्या?तुम्हारी नियत तो ठीक है न ?मेरा झूठ पकड़ में आ रहा था मेरा लण्ड पैंट केऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।"क्या बात है..... तुम्हारा मुंह लाल क्यूँहो रहा है.......?"मेरी नजरों के सामने दीदी की ब्रा मेंउभरी हुयी चुंचियाँ के भीतर से झाँकने लगी।मेरी नजरें उनके स्तनों पर गड़ गयी। दीदी नेनीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा... औरमुझे गर्माते देख कर सीधे चोटकी......"संजय .... मेरी छाती में क्या देख रहेहो …झांक कर ?""हाँ... नही.... क्या....?" मैं बुरी तरह झेंप गया।"अच्छा.. अब मैं बताऊँ......कि क्या देख रहेहो तुम....." मैं एकदम से शरमा गया।"दीदी ... वो...नही....सो.... सॉरी...""क्या सॉरी..... एक तो चोरी...फिर सॉरी.......""दीदी .... अच्छी लग रही है देखनेमें .....सॉरी कहा न "मैं "हाँ... नही.... क्या....?" मैं बुरी तरह झेंपगया।"अच्छा.. अब मैं बताऊँ......कि क्या देख रहेहो तुम....." मैं एकदम से शरमा गया।"दीदी ... वो...नही....सो.... सॉरी...""क्या सॉरी..... एक तो चोरी...फिर सॉरी.......""दीदी ... अच्छी लग रही थी.....सॉरी कहा न "दीदी मेरे पाइंट पर से लण्ड के उभार को देखरही थी। मैंने ऊपर हाथ रख लिया।"नहीं देखो... इधर.. " मैं शरमा गया।दीदी मुस्कुरा उठी।"तो कान पकड़ो........"मैने अपने कान पकड़ लिए...... "बस...ना..."हाथ हटाने पर लण्ड का उभार फिर से दिखनेलगा। वो हंस पड़ी।"नहीं देखो... इधर.. " मैं शरमा गया।वो मुस्कुरा उठी।अब मुझे समझ में आगया था कि खुला निमंत्रण है। मेरा लण्डका पूरा आकार तक दिखने लगा था। मैं उठकर दीदी के पास आ गया। मैंने उनके कंधे परहाथ रखा और कहा-"दीदी .....तुम्हारेभी तो उभार हैं...... एक बारदिखा दो.....न ...प्लीज़ !"मैंने दीदी की पूरे बदन को देखा और फिरअचानक ही ...... दीदी को बिस्तर पर चितलिटा दिया और उनकी पीठ पर सवारहो गया. वो कुछ कर पाती, उनके पहले मैंनेउसको जकड़ लिया. मेरे लण्ड का जोर उनकेचूतड़ों पर महसूस होने लगा था।दीदी हलके से चीखी .."संजू ..... ये क्या कररहे हो ...?""दीदी ...मुझसे अब नहीं रहा जाता है ....!"मैंने तुंरत ही उनके होंट पर अपने होंट रखदिए। मुझे लगा कि शायद दीदी को मजा आनेलगा था।मैंने उनके भारी स्तनों को पकड़ लिया औरस्तनों को मसलना चालू कर दिया।वो सिमटी जा रही थी। पर मैंने हाथों से उनकेउभारों को मसलना जारी रखा। वो अपनेको बचाती भी रही...पर मुझे रोका भी नहीं।जब मैंने उनके उभारों को अच्छी तरह सेदबा लिया तब उसने मुझे पीछे की ओरधक्का दे दिया और कहा -"बहुत बेशरमहो गए हो...."उनके हाथ से पेंसिल नीचे गिर गयी। वो जैसेही उठ कर पेंसिल उठाने को झुकी, मैंने फिर सेउनके स्तनों पर कब्जा कर लिया।"क्या हुआ.... अब बस करो ....छोड़ दो न .....ये मत करो .... संजू .....हटो न ..?"" अरे ..... हट जा न ...... हटो संजय ...""मना मत करो दीदी !""देखो मैं चिल्ला पडूँगी .."'नहीं नहीं ...ऐसा मत करना ....... दीदी ...प्लीज़ एक बार देखने दो न ...!"मैंने दीदी के नरम नरम गोल चूतड़ों को हाथ सेसहला दिया। गोलाइयां सहलाते हुएअपना हाथ दोनों फाकों की दरार मेंघुसा दिया और फिर अपनी उंगली घुसा करउनकी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझेबहुत आनंद आ रहा था। दीदी वैसेही झुकी रही। अब मेरे हाथ उनकी चूतकी तरफ़ बढ गए।वो सिहर उठी। जैसे ही उनकी चूत पैन्टी केऊपर से दबी... चूत का गीलापन मेरे हाथ मेंलग गया। अब मैंने उनकी चूत को भींचदिया पर जल्दी से हाथ हटा दिया। औरदीदी सीधी खड़ी हो गयी।मैं मुस्कुराया "दीदी .. मज़ा आ गया.... तुम्हेंकैसा लगा...?""अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो....स्केच नहीं बनाने क्या...?"दीदी भी मुस्कुरा कर कहा।मैंने कहा- नहीं दीदी प्लीज़ मुझे अभी कुछऔर करना है ..... और मैंनेदीदी को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया औरउनकी पीठ के ऊपर फिर से बैठ गया और मैंनेअपना नेक्कर उतार दिया औरदीदी की पैन्टी भी उतार दी।अब मैं और दीदी नीचे से नंगे हो गए थे। मैंनेफिर अपने लण्ड को उनके चूतड़ों पर दबाया,दीदी ने भी चूतड़ों को ढीला छोड़ दिया ...औरमेरा लण्ड उनकी गांड के छेद से टकरा गया।दीदी ने फिर कहा-" अब बस करो ....छोड़दो न ..... ये मत करो .... संजू .....हटो न ...""आह संजू ... मत करो ...न ......देखो तुमने ...क्या किया ?""दीदी ..कुछ मत बोलो ...आज मैं तुम्हे छोड़नेवाला नहीं .... मेरी अपनी इच्छा जरूरपूरी करूँगा !"मुझे तो आनंद आ रहा था ... मैंने अपने लण्डको दीदी की गांड के छेद से रगड़ना शुरू किया,दीदी चुप रही।फिर अचानक मैंने दीदी को सीधा कर दिया ...और अपना लण्ड उनको दिखाया ..."देखो नदीदी ... अपनी गांड से इसका क्या हालकिया है तुमने..."उसने कहा .."देख संजय ...मैं हाथ जोड़ती हूँ ...मुझे छोड़ दे अब ... प्लीज़ .."" दीदी ...सॉरी .... ये मेरे बस में नहीं है अब ......मैं अब पूरा ही मजा लूँगा ..... तुमने मुझे बहुततड़पाया है .."मैंने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए, उनके बूब्सको देख कर मेरा लण्ड ज़ोर ज़ोर से झटकेखाने लगा तब सबसे पहले मैंने उनके निप्पलको चूपा। उनके निप्पल भी बड़े सख्त हो रखेथे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आरहा था।फिर मैं उनके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोरज़ोर से दबाने लगा मेरे इस तरह करने सेवो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंनेउनकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बालनहीं थे और उनकी चूत बहुत मस्त लगरही थी। उनकी चूत को देख कर मेरे मुंह मेंपानी आ गया और मैं उनकी चूत को चाटनेलगा। दीदी ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी- आ आआ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगीथोड़ी देर तक उनकी चूत चाटने के बाद मैंनेदेखा कि वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैंउसको और गरम करना चाहता था इसलिएअब मैं अपने लण्ड को उनके पूरे बदन परघुमाने लगा, पहले उनके चेहरे पर अपने लण्डको लगाया फिर उनकी गर्दन पर, फिर उनकेबूब्स पर, उनके निप्पल पर, उनके बूब्स केबीच में अच्छी तरह मैं अपने लण्डको लगा रहा था। मेरे लण्ड से जो पानी निकलरहा था वो भी उनके पूरे बदन पर लगरहा था जिससे वो और ज़्यादा गरमहो रही थी। मैंने अपने लण्ड को उनके बूब्सके बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरेलण्ड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर सेदबाने लगी।८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लण्ड देखतेही उनके होश उड़ गए और वो कहनेलगी कि नहीं संजू प्लीज़ मेरे साथ वो मतकरना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- डरो मतदीदी मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा।मगर वो मान ही नहीं रही थी।तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इसहथियार को अपने मुंह में ले सकती हो?उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बारबार प्लीज़ कहने पर वो मान गई। अब वो मेरेलण्ड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत मेंथा। उससे खूबसूरत लड़की को मैंनेअपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था औरवो मेरा लण्ड चूस रही थी।थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाईका काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आरहा था। फिर क्या था मैंने अपना सारा मालदीदी की मुँह में ही डाल दिया। दीदी को शायदख़राब लगा और उन्हें उलटी आने लगी।मैं जल्दी से उनकी चूत पर झुक गया। मादकसी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठउनकी चूत पर रख दिये।वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उनकी चूतके होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होलेमैं उनकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा।वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंनेअपनी जीभ की नोक उनकी चूत के छेद मेडाली और अन्दर तक ले गया।वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़नेलगा। उनकी सिसकियां बढ़ने लगी। अबवो सारे बहाने छोड़ कर दोनों हाथो से मेरे सरको अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपनेलगी और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया औरमैं उसका सारा पानी पी गया।मैंने देखा कि वो हांफ रही है ओर मेरी तरफ़देख रही है, मैंने उनके कान के पास जाकरफुसफुसा के कहा- दीदी अब बोलो तुम्हेकैसा लगा ?दीदी ने आँख खोली और गहरी साँस ली। मैंउनके ऊपर से नीचे आ गया, दीदी तुंरतबिस्तर पर से नीचे आ गयी। अब दीदी ने मुझेबेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लेटगई और मुस्कराया......उसने मुझे चूमना चालूकर दिया। एक हाथ नीचे ला करमेरा मुरझाया हुआ लण्ड पकड़ लिया औरउसे हिलाने लगी, मसलने लगी.......लण्ड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा.दीदी अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरेमुठ मारने लगी। कुछ ही देर में मेरा लण्डचोदने के लिए तैयार था। दीदी मेरे ऊपर लेटगयी, अपनी दोनों टांगे फैला दी, लण्डका स्पर्श चूत के आस पास लग रहा था। मैंनेउनके होंट अपने होटों में दबा लिए। हमदोनों अपने आप को हिला कर लण्ड और चूतको सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे।उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया।मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी।अचानक मेरे अन्दर आनंदकी तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी। मेरा लण्डफिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिएउतावला हो गया। मैंने बाजी पलटी औरदीदी को नीचे लिटा दिया और कहा- दीदी एकबार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुतमज़ा आएगा।वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बारथोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गईऔर मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल करअपने लण्ड और उनकी चूत पर लगाया औरअपना काम धीरे धीरे शुरू किया।उसे बहुत दर्द हो रहा था और मेर लण्डउनकी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुसगया। उनके मुंह से एकमीठी सी सिसकारी निकल पड़ी..."संजू .... अआह हह हह हह..... सी ई स स स ई एई....!"एक धक्का मारा मेरा आधा लण्ड उनकी चूतमें चला गया। वोह चिल्लाई- आआआआअहह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह . ..,संजू .......धीरे !उनके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड उनकी चूतमें पेल दिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा,मैंने महसूस किया कि दर्द के मारे उनकेआँखों से आंसू निकल आए थे। मैंने उनकेगालो को चूम कर पूछा," ज्यादा दर्दहो रहा है..?"उसने जवाब दिया "इस दर्द को पाने के लिएहर लड़की जवान होती है.. इस दर्द को पाएबिना हर यौवन अधूरा है !"मैं उनके इस जवाब पे बसमुस्कुरा ही पाया क्योंकि मेरे पास बोलनेको कुछ था ही नही..अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।वो मुझ में लिपटी हुई थी...और मैं उसे चूमरहा था...वो मेरे नीचे थी और अपनेपैरों को मेरे कमर के इर्द गिर्द लपेटे हुएथी मानो कोई सर्पिनी चंदन के पेड़ को अपनेकुंडली से कसी हो..अब मैंने धीरे धीरेअपनी रफ़्तार तेज कर दी... पूरे केबिन मेंमादक माहौल था.....हमारी सिसकारियां ज़हाज के इस केबिन मेंऐसे गूंज रही थी मानो जलजला आने से पहलेबदल गरज रहे हो...वो जलजला जल्द ही आया जब मैं अपनेकमर की हरकतों की वजह से चरम सीमा पेपहुँचने वाला था .. उधर दीदी भी मुझे बोलरही थी...".. संजू प्लीज और जोर से..औरजोर से ...मेरे शरीर में अजीब सी हलचलहो रही है "... मैं समझ गया कि वो भी चरमसीमा पे है...इस पर मैंने अपनी रफ्तारकाफी तेज कर दी। देखते ही देखते हम उफानपर थे और सैलाब बस फूटनेही वाला था कि मैंने अपना लण्ड बाहरनिकला और मानो मेरे लण्ड से कोईझरना फ़ूट पड़ा हो.. मैं वापस उनके बाँहों मेंनिढाल हो गया ..बहुत देर बाद जब मैं उठा औरदेखा कि संपा दीदी की जांघों पर खून गिरा हैतब मैं समझ गया कि वो अभी तक अन्छुईथी .. मुझे ये देख कर अपने किस्मत पर गर्वहो रहा था और साथ ही साथ दीदी के बारे मेंसोचने लगा कि ..ऐसी लड़की नहीं थी कि किसी को भी अपनाशरीर सौंप दे .. इतने दिनों से अकेलेकोलकाता में रहने के बाद भी वो आज तकअन्छुई थी...मैंने पास में पड़े तौलिए को उठाया और उनकेबूर के ऊपर लगे खून को साफ़ करने लगा। जबखून साफ़ हुआ तो मैंने एक बात गौर की औरमुस्कुराने लगा।दीदी ने मुझ से पूछा कि"... तुम क्या सोच करमुस्कुरा रहे हो ..?"मैंने उनके बिल्कुल बिना बाल के गुलाबकी पंखुड़ियों सी योनि-लबों को चूम कर केबोला... " दीदी सच बताऊँ तो .. मैंनेतुम्हारी बूर अभी तक नहीं देखी थी.. औरसाफ़ करते वक्त अभी ही देखा....!"और हम दोनों हंस पड़े..उस दिन से अगले ४ दिन तक आप समझही सकते है कि हमारे सैलाब में कितनी बारउफान आई होगी.. जब तक हम अंडमाननहीं पहुँच

मेरी पहली चुदाईमेरा नाम कविता है मै १७ साल की हूँ मैअपनी सेक्स कहानी आपको बताती हूँ . जब मेरेभइया मोंटू ने मुझे पहेली बार चुदाईका मजा चखाया .एक दिन की बात है मै अपनी रूम मैसो रही थी मेरी कमर मै जोरों का दर्दहो रहा था घर मै कोई नही था तो मैंने मोंटूको बुलाया कि मेरी कमर पे मालिश कर दे मैउल्टा लेट गई और मेरे कमीज़ के अंदर अपनेहाथों से मोंटू मालिश करने लगा धीरे धीरेमेरा दर्द कम होने लगा तो मेरी आंख लग गईजब आंख खुली तो मेरे बदन पे कमीज़नही था और मेरी ब्रा भी नही थी. मोंटू मेरे बड़ेबड़े दोनों बूब को बारी बारी चूस रहा था मुझेभी मजा आरहा था इसलिए मै भी चुप रहकरचुसवाती रही मोंटू ने मेरी दोनों निपल को चूसचूस के बहुत टाईट कर दी थी मै जग कर भी सोनेका नाटक कर रही थी क्योंकि मुझे बहुतही मजा आ रहा था मेरी चूत पानी पानी होकरमोंटू के लंड का इंतजार कर रही थी लेकिन मै यहबात मोंटू को बता नही सकती .इतने मै मोंटू ने अपने सारे कपड़े उतार दिए औरपूरा नंगा हो गया मै तो उसका बड़ा लंड देख करपागल हो रही थी मोंटू ने अपना लंड (लौड़ा ) मेरेबूब पर रख कर रगड़ना शुरू किया तो मुझे औरमजा आने लगा मोंटू का लंड मेरी दोनों निपल सेखेल रहा था मै लंड अपने मुंह मै लेकरचूसना चाहती थी लेकिन क्या करू , और मै अबसोच रही थी के मोंटू मेरी सलवार भी उतार देऔर मेरी चिकनी हो रही चूत मै लंड डाल करमुझे चोदे लेकिन मोन्टू तो अपने लन्ड से मेरेबूब्स से खेलने में लगा था।थोड़ी देर बाद मोन्टू ने अपना लन्ड मेरे मुंह परलगाया तो मुझ से रहा नहीं गया, मैंने तुरन्तही लन्ड को अपने मुंह में ले लिया और जोर जोरसे चूसने लगी। मोन्टू भी अपने आपे मेंना रहा और बोला - बहन ! मेरे लन्ड को औरजोर से चूसो, लोलीपोप की तरह चूसो, बहुतमज़ा आ रहा है आऽऽऽऽहा आऽऽऽऽऽह म्म आ।मैंने अपने मुंह से लन्ड को छोड़ दिया औरबोली- बस भैया! अब मेरी चूत की बारी है।भोंसड़ी की कभी की पानी पानी हो कर तुम्हारेलन्ड का इन्तजार कर रही है। मोन्टू ने तुरन्तही मेरी सलवार उतार दी। मैंनेपैन्टी नहीं पहनी थी तो मोन्टू बोला-बहना कच्छी क्यों नहीं पहनी? मैं बोली-रोज़ाना रात को अपनी उन्गली से अपनी चूतको चोदने में कच्ची पहन कर मज़ा नहीं आता।अब बातें कम करो और मेरी चूत को चाटो।तुरन्त ही मोन्टू मेरी टांगें फ़ैला कर चूतको चाटने लगा तो मेरी चूत, भोंसड़ी की, औरपानी छोड़ने लगी।भैया अपनी पूरी जबान मेरी भोस में डाल करचाट रहा था। मेरे मुंह से आआऽऽऽहऽऽ निकलनेलगा और मैं मोन्टू के लन्ड को अपने हाथ मेंलेकर जोरों से हिलाने लगी तो मोन्टू पलट करमेरे ऊपर आ गया और बोला- मेरी बहना ! अबमैं अपना लन्ड तेरी चूत में डाल कर चोदता हूं।उसने मेरी चूत पे अपना लन्ड रख कर जोर सेधक्का दिया तो मैं खुशी के मारे आऽऽऽहें भरनेलगी। भैया मुझे चोदे जा रहा था और मैंचुदवाती जा रही थी। थोड़ी देर तक चुदाई केबाद भैया ने अपना लन्ड मेरी चूत में से निकालकर मुझे ऊपर आने को कहा। भैया नीचे लेटगया और मैं उसके ऊपर। मैंनेअपनी पीकी भैया के लन्ड के ऊपर रखी औरधीरे से धक्का लगाकर फ़िर से चुदाई शुरू करदी। भैया मेरी चूत में नीचे से धक्का मार रहे थे।मैं भी उछल उछल कर भैया के लन्ड का मज़ा लेरही थी। भैया मेरी चूत को चोदते चोदते मेरेदोनो बूब्स को अपने हाथों से दबा रहे थे। मेरेपूरे बदन में बिजली सी दौड़रही थी कि भैया का वीर्य निकल पड़ा। मैंनेतुरन्त अपनी भोस में से भैया का लौड़ा निकालदिया और भैया को बोली- मोन्टू ! तूनेअपनी चुदाई पूरी कर ली, अब मेरा क्या होगा।मोन्टू ने एकदम मुझे लिटाया और मेरी चूतको अपनी जबान से चोदने लगा। मैंभी अपनी चूत को हिला हिला करचुदवाती रही और चुदाई का पूरा मज़ा ले लिया।अपने भैया से चुदाइ का मज़ा लेने के बाददूसरा नम्बर था मेरे पड़ोस में रहने वाले एकलड़के का। मैं मन ही मन उसे चाहती थी पर उसेकहने में शरमाती थी। एक रात को मैं अपनी छतपर गयी तो देखा कि वो अपने घर की छत पेसो रहा था। मैंने उसे आवाज़ दी पर उसनेसुना नहीं। फ़िर मैंने उसे एक छोटा सा पत्थरफ़ेंक कर मारा तो उसकी नींद खुल गयी औरवो मेरे पास आ गया । मुझ से पूछा कि क्या कररही हो और मुझ से चिपट कर मेरे होठों को चूमलिया। जैसे ही वो मेरे गले से लिपटा, मेरी चूत मेंउबाल सा आ गया। वो मुझे जोर जोर से किसकरने लगा और मुझे अपने बिस्तर परलिटा लिया, मेरी सलवार खोल ली औरअपना लन्ड मेरी चूत में डालने की कोशिश करनेलगा।तभी उसके घर वाले जाग गये और मैंअपनी खुली सलवार में ही अपने घर आकरसो गयी। इस प्रकार हमारी कहानी शुरू हुई। उसदिन के बाद वो मुझ से हर रोज मिलने लगा औरहमारा चूत लन्ड का खेल चलता रहा। वो मेरेहोटों को चूसता तो मेरी जान ही निकलजाती और उसका लन्ड हाथ में पकड़लेती जो कि डण्डे की तरह खड़ा हो जाता था।वो कभी मेरे घर पर आ जाता और कभी मैं उसकेघर पर जाकर गान्ड मरवाती थी।एक दिन उसने कहा कि मेरा एक दोस्त है, तुमउससे दोस्ती कर लो। मैंने मना करदिया तो वो नाराज़ हो गया। तब मैंने कहा- ठीकहै, दोस्ती कर लूंगी पर उससे चुदाईनहीं करवाउंगी। तो उसनेबताया कि उसका लन्ड बहुत ही मस्त है, एकबार करवा कर तो देखो। उस टाईम मैंने कुछनही कहा.एक दिन वो अपने दोस्त को अपने घर पर लेआया और मुझे भी अपने घर पर बुला लिया।मुझे यह पता नही था कि उसने अपने दोस्तको घर पर बुलाया हुआ है।. और मैं उसके घर परचली गयी . लेकिन जब जाकरदेखा तो उसका दोस्त उसके घर पर ही है तो मैंवापस जाने के लिए मुडी तो उसने मुझेपकड़ा और कहा कि ये मेरा ख़ास दोस्त है औरइसकी इच्छा पूरी कर दो उसने बहुत मिन्नतेंकि तब मैं मान गयी . तब वो बहारचला गया और उसके दोस्त ने मुझे नंगा करदिया और मेरे मम्मे चूसने लगा और फिर मेरेहोठों को चूसने लगा .>p>तभी वो भी आ गया और एकमेरी गीली चूत को चाटने लगा और एक मेरेहोठों को चूसने लगा मुझे बहुत ही मजा आरहा था . तभी उन्होंने मुझे झटके से अपनेबिस्टर पर लिटा लिया और उसके दोस्त ने एकझटके से मेरी चूत में अपना लंड डालदिया मेरी चीख निकल गयी .और उसने मुझेजोर जोर से चोदना शुरू कर दिया और दूसरे नेअपना मोटा लंड मेरे मुंह में डाल दिया . और जोरजोर से चुसाने लगा . मुझे बहुत ही मजा आरहा था . तभी मुझे किसी के आने कि आहट हुईतभी मैंने देखा कि मेरे प्रेमी कि कोईदूसरी लड़की से भी दोस्ती है उसनेउसको भी अपने घर पर बुला लिया था.मुझेजलन भी हुई और थोडी राहतभी क्योंकि मेरा साथ देने वाली आ गयी थी .वो उस लड़की को भी चोदा करता था लेकिनमुझे उस दिनही पता लगा कि वो दूसरी लड़की कि चुदाईभी करता है .फिर मेरी दोस्ती उस लड़की के साथ भी हो गई.उस लड़की ने भी अपने ३ -४ प्रेमी बनाये हुएथे उसने मुझे उनके साथ सेक्स करने के लिएप्रोपोज किया मैं तैयार हो गई क्योंकि मैंनेदो के साथ सेक्स करने का मज़ा चखलिया था इसलिए मेरी चूत में आग लग रही थी .वो मुझे अपने दोस्त के घर पर ले गई वहां परहमने चाय पी और वो मुझसे बातें करनेलगा और साथ साथ उसकी नज़र मेरी बूब्स परथी . मुझे भी मज़ा आ रहा था ......................इसदिन के बाद दोस्तों पता नही मैं कितने लड़कों सेचुदी हूँ और आज भी चुदाई करवाती ह

जवान बहन की चुदाई का मज़ादोस्तों, सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मेरा नामराकेश है. मेरी उम्र 19 साल है. मैं पहली बार आपलोगों के सामने अपनी कहानी ला रहा हूँ. मुझेअपनी इस कहानी को बताते हुए थोड़ी शर्मभी आ रही है. पर जब मैंने देखा की मेरे जैसे कईभाई और बहन आपस में सेक्स कर चुके हैंतो मेरा भी हौसला बढ़ गया और मैंनेभी सोचा की आप लोगों को सब कुछ बता दूँजो की मेरे और मेरी सगी बहन के बीच में हुआ.तो दोस्तों लीजिए मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ.मेरे घर पर मैं, मेरी बहन, मेरे मम्मी और डैडी चारलोग रहते हैं. मेरे मम्मी और डैडी दोनों सुबह कामपर चले जाते हैं और मैं और मेरी बहन कॉलेज औरस्कूल. ओह ! मैं बताना भूल गया कि मैं बी एफर्स्ट ईयर में हूँ और मेरी बहन नौवीं क्लास मैंपढ़ती है. मेरी बहन का नाम पूजा है. वो 16 सालकी है. उसकी हाईट 5 फुट 1 इंच है. वो एकदम दूधकी तरह गोरी और बहुत चिकनी है.मेरा रंग भी गोरा चिट्टा है. मेरी हाईट 5 फुट 5 इंचहै और मेरे लंड का साईज़ 6 इंच का है.जैसा की हर कहानी में होता है,मेरा भी अपनी बहन के बारे में कोई बुरा ख़यालनहीं था. पर एक दिन जैसे मेरी दुनिया ही बदलगयी. हुआ यूँ की मैं एक बार कॉलेज से जल्दी आगया. मेरे पास घर की एक एक्स्ट्रा चाबी थी. मैंताला खोल कर अंदर आ गया और देखा की घरपर कोई नहीं था. मेरे घर के पीछे एक लान था.वहां पर मैंने देखा की मेरी बहन पूजा औरउसकी सहेली रेखा हँस हँस कर खेल रही थीं.लान की दीवारें ऊँची थीं और बाहर से कोई अंदरदेख नहीं सकता था. रेखा के हाथ मैंपानी का पाईप था. वो पूजा पर पानी डालरही थी. मेरी बहन बचने की कोशिश कर रही थी.दोनों के बदन भीगे हुए थे और उन दोनों के मुम्मेसाफ़ नज़र आ रहे थे. ये देख कर मेरा लंडखड़ा हो गया और मैं छुप कर उन लोगों का खेलदेखने लगा. कुछ देर के बाद वो एक दूसरे को किसकरने लगीं और मुम्मे दबाने लगीं. थोड़ी देर केबाद पूजा ने रेखा के कपडे उतार दिए और उसकेऊपर चढ़ गयी. रेखा का रेशमी बदन देख करमेरी सांस जहाँ की तहाँ अटक गई. मैंने जिंदगी मेंपहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था.उसका दूधिया बदन धूप में चमक रहा था. उसकेमुम्मे बहुत कसे हुए थे और चूत पर एक भी बालनहीं था. पूजा रेखा को लिप्स पर किस कररही थी. उसका एक हाथ उसके मुम्मों परथा और दूसरे हाथ से वो उसकी चूत को मसलरही थीअब रेखा नें मेरी बहन पूजा के कपडे उतारने शुरूकिये. मैंने सोचा कि अब मुझे औरनहीं देखना चाहिए पर वासना की आग में मैं येभूल गया की वो मेरी छोटी बहन है औरवो भी सगी. जैसे जैसे पूजा के कपडे उतरने शुरूहुए मेरा लंड और तन्नाता गया. पहले रेखा नेउसकी स्कर्ट उतारी और फिर उसकी टी शर्ट.मेरी बहना ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी. हाय ! उसकेछोटे छोटे दूध देख कर में जैसे पागल सा हो गया.रेखा बेतहाशा उसके लिप्स को किस कररही थी *और उसके मुम्मे दबा रही थी. अबरेखा का हाथ उसकी कछी की और बढ़ा.मेरी बहन नें अपनी टाँगे सिकोड़ लीं. रेखा हँसतेहुए बोली अरे यार मुझसे क्यों शर्माती है, चलनंगी हो जा. एक साथ मजे करेंगे. फिर मेरी बहन नेंटांगें खोल दीं**च. रेखा नें पूजा की कछी उतारदी. मैं अपनी छोटी बहन को देख कर दंग रह गया.वो बला की खूबसूरत थी. मैं रेखा को छोड़पूजा की और बड़े ध्यान से देखने लगा की आगेवो क्या करती है. अब दोनों लड़कियाँ पूरी तरहसे नंगी थीं. मैं उन्हें देख कर मदमस्त हुआजा रहा था. मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड परचला गया और मैं अपनी बहन पूजा को देख करमुठ मारने लगा. पूजा रेखा के ऊपर चढ़ी हुईथी और उसे किस कर रही थी. दोनों एक दूसरे केमुम्मों को दबा रही थीं. मेरी बहन के चूतड़ एकदमगोल और टाईट थे. पूजा की चूत पर छोटे छोटेबाल थे. उसकी गुलाबी चूत देख कर मेरा मन हुआकी अभी जाऊँ और उसे कस के चोद डालूँ.ऐसा सोचते ही मेरे लंड का पानी निकल गया औरमैं बुरी तरह से झड़ गया.उधर दोनों लड़कियां भी उत्तेजित हो चुकी थीं.उनकी हरकतें और सेक्सी होती चली गयीं.पूजा अपनी चूत से रेखा की चूत रगड़ रही थी.दोनों के चेहरे एकदम लाल हो चुके थे औरदोनों बुरी तरह से हाँफ रही थीं. कुछ देर के बादउन लोगों के कपडे पहने (जो की धूप होनेकी वजह से सूख गए थे) और घर की तरफ आनेलगीं. मैं तुरंत घर से बाहर चला गया औरदोनों को पता नहीं चला की मैं वहाँ पर था.थोड़ी देर के बाद मैं फिर वापस आया. रेखा औरपूजा ड्रॉईंग रूम में बैठी थीं. मैंने आतेही रेखा को हेलो किया और उसे ऊपर से नीचेतक गौर से देखा.मेरा लंड उसे देखते ही सलामी देने लगा. रेखा नेभी मेरा पेंट के ऊपर उभार महसूस किया औरवो भी बड़े गौर से मेरे लंड को देखने लगी.रेखा की गोरी गोरी टांगें दिख रही थीं.उसकी स्कर्ट थोड़ी सी ऊपर उठी हुईथी या उसने जान बूझ कर ऐसा किया था.पूजा बोली आप लोग बैठो मैं चाय बना करलाती हूँ. पूजा के किचन में जाते ही रेखा नें एकमदमस्त अंगडाई ली. मेरा दिल बेकाबूहो गया और मैंने उसके सामने ही अपने लंडको पेंट के ऊपर से ही मसल लिया.वो मुझको भईया कह के बुलाती थी.वो मुस्कुरा पड़ी और बोली, क्या बात है भईया,बड़े बेचैन लग रहे हो?मैंने कहा आजकल बहुत मनकरता हैऔर ऐसा कहते हुए मैंने फिर से अपने लंडको मसल दिया. वो खिलखिला कर हँस पड़ी,क्या मन करता है? मैं बोला, इतनी भोली मतबनो, मैं जानता हूँ तुम लोग थोड़ी देर पहलेक्या कर रहे थे. ये सुनते ही वो सकपका गई औरकुछ बोल ही नहीं पाई.मैं फुसफुसा कर बोला, मुझे अपना राजदारबना लो वरना तुम लोगों की पोल पट्टी खोलदूंगा वो घबरा गई और बोली, नहीं प्लीज यार,ऐसा मत करना. हम लोग तो सिर्फ मज़े कर रहेथे.फिर थोड़ी देर बाद उसने हैरानी से पुछा, तुम्हेंकैसे पता चला? मैंने कहा, मैं पहले से ही घर मैंथा जब तुम लोग लान मैं एक दूसरे के साथ मज़ेकर रहे थेये सुनकर रेखा का चेहरा शर्म से लालहो गया. मैंने मौका देख कर रेखा की चूची दबा दी.रेखा कुछ बोल पाती, तभी मेरी बहन पूजा चायलेकर आ गयी. रेखा के चेहरे का रंग उड़ा हुआ देखकर उसने हैरानी से पूछा,अरे तुझे क्या हुआ?मैंने जवाब दिया, कुछ नहीं येहमारे आपस की बात है, वो तुझे कुछनहीं बताएगीऐसा कह कर मैंने रेखा की तरफइशारा किया कि वो मेरी बहन को कुछ ना बताये.जब रेखा कुछ नहीं बोली तो पूजा ने लापरवाही सेअपने कंधे उचकाए और चाय सर्व करने लगी. मैंचाय की चुस्कियों के साथ मुस्कुराता हुआरेखा के बदन को निहारता रहा. रेखा ने जल्दी सेअपनी चाय खत्म की और चलने लगी. मैं उसेदरवाज़े तक छोड़ने आया और एक बार फिरफुसफुसाता हुआ बोला, किसी से मत कहना, औरमुझे कल शाम को इंदिरा पार्क में मिलो.रेखा बिना कुछ कहे वहाँ से भाग गई. अब मेरेपूरा ध्यान अपनी प्यारी बहन पूजा पर गया.मेरा लंड पहले से ही गरम था. जब पूजा कप औरप्लेट उठा रही थी तो उसके थोड़े से मुम्मे दिखाईदे रहे थे. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने बाथरूम मेंजाकर पूजा के नाम की मुठ मारी.अब मैंने सोच लिया की चाहे कुछ भी हो जाए मैंअपनी बहन को चोद कर रहूँगा. रात को हम लोगखाना खा कर सोने चले गए. ममी पापा एक कमरेमें सोते थे और मैं और पूजा एक कमरे में पर हमारेबेड अलग अलग थे. रात को जबपूजा सो गयी तो मैं उठा. मेरे लंडको शांती नहीं मिल रही थी. मैं चुपके से पूजा केबेड के पास गया. पूजा गाउन पहन कर बेसुधसोयी हुई थी. मैंने डरते डरते उसका गाउन उपरकी और खिसकाना शुरू किया.उसकी चिकनी जांघें दिखाई देने लगीं. मेरे लंडका आकार और बढ़ गया और पजामे में मचलनेलगा.मैंने अपनी प्यारी बहन पूजा का गाउन पेट तकउपर कर दिया जिस से उसकी पैंटी साफ़ दिखाईदेने लगी. मैंने वासना से भर करअपनी लाडली बहना को देखा और उसे चोदने केलिए ललचाने लगा. मैंने फिर जी भर करउसकी टांगों को सहलाया और उसकी पैंटी परभी हाथ फेरा. पूजा का गाउन उपर सेकाफी खुला हुआ था. मैंने उसके गाउन के दो तीनबटन खोल दिए उफ़....उसने नीचे सेब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसके कारणउसकी छोटी छोटी दोनों चुचियाँ दिखाई देने लगींमैंने डरते डरते पूजा की एक चूची पर हाथ रखदिया. अह्हह्ह......मज़ा आ गया......बहुत नरमथी.....इतनी सौफ्ट कि क्या बतायूं. अब मैं धीरेधीरे उसकी दोनों चुचियाँ बारी बारी से दबानेलगा.सच में बहुत मज़ा आ रहा था. एक हाथ से मैंनेअपना लंड निकाला और पूजा का हाथ में दे करउसकी मुठी में बंद कर दिया. अब पूजा का हाथपकड कर मैं मुठ मारने लगा. इन सब के बावजूदपूजा गहरी नींद में सोयी हुई थी क्योंक उसकेहल्के हल्के खर्राटे की आवाज से कमरा गूँजरहा था. मुठ मारते हुए मैं एक हाथ सेउसकी चूची सहला रहा था. थोड़ी देर मेंही मेरा लंड अपनी प्यारी बहन के हाथ में झड़गया. मेरा वीर्य उसके गाउन और हाथ पर गिरगया. अपनी बहन को इसी हालत मेंअधनंगी छोड़ कर मैं अपने बेड पर आ गया. दिनमें कई बार मुठ मार कर और इस बार पूजा केनाज़ुक हाथों से मुठ मरवा कर मैं बहुत थकचुका था. थोड़ी देर में मैं भी गहरी नींद में सो गया.सुबह पूजा सो कर उठी उसी वक्त मेरी नींदभी खुल गयी. पर मैं सोने का नाटककरता रहा और देखनेलगा कि पूजा की क्या रिएक्शन है. पूजा अपनेगाउन को अस्त व्यस्त देख कर हडबडा गई औरतेज़ी से अपने गाउन के बटन बंद करने लगी.वो हैरानी से अपना हाथ देख रही थी जिस परमेरा माल सूख कर चिपका हुआ था. वो साथसाथ में मुझे भी देख रही थी कि मैं जाग रहा हूँया सोया हुआ. मैं आँख बंद करके सोने का नाटककरता रहा. गाउन बंद करके पूजा उठ कर ब्रशकरके चाय पीने चली गयी. इसके बाद मैं भी उठा.हम लोग एक साथ चाय पी रहे थे. सुबह का टाइमहडबडी वाला होता है. पापा ममी ऑफिस के लिए,पूजा स्कूल के लिए और मैं कोलेज जाने के लिएतैयार होने लगे. सुबह आठ बजे हम लोग अपनेअपने गंतव्य की और निकल पड़ते थे.क्योंकी पूजा का स्कूल रस्ते में पड़ता था, मैंबाईक पर पूजा को छोड़ कर कॉलेजचला जाता था. बाईक पर बैठने के बाद जब हमघर से निकल गए तो मैंने पूजा से पूछा,मैं: यार पूजा, एक बात सच सच बताएगी?पूजा: क्या भय्या?मैं: तेरा कोई बोयफ़्रेंड है?पूजा (घबड़ा कर): नहीं तो? आप ऐसा क्यों पूछरहे हो?मैं (हँसते हुए): कुछ नहीं यार. बस ऐसे ही पूछरहा हूँ.पूजा: कुछ तो बात जरुर है, वरना आप अचानकआज ही क्यों पूछ रहे हो.मैं: अरे यार बस यूँ ही मन मेंआया कि मेरी बहना बड़ी हो गयी है.उसका भी मन करता होगा बोयफ़्रेंड बनाने को.पूजा: क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?मैं (मन मसोस कर): नहीं यार. कोई पटती ही नहीं.पूजा खिलखिलाकर हंस पडी और बोली: अरेभय्या आप इतने स्मार्ट और हैण्डसम हो. मैंहोती तो आप को ही अपना बोयफ़्रेंड बना लेती.मैं: तो बना ले यार.पूजा: ओके आज से आप मेरे बोयफ़्रेंड हो.तब तक स्कूल आ गया. मैंने पूजा को छोड़तेसमय उसकी आँखों में झांककर कहा: बोयफ़्रेंडऔर गर्लफ्रेंड बहुत से ऐसे काम करते हैं जो हमभाई बहन नहीं कर सकते.पूजा: कोई बात नहीं.पूजा चली गयी. मैं उसे जाते हुए देखता रहा.उसके मस्त गोल गोल चूतड़ उपर नीचे हो रहे थे.मेरा लौड़ा पेंट में बुरी तरह तन गया.तभी पूजा पीछे मुड़ी. मैंने उसे देख कर फ्लाईंगकिस मारा. वो मुस्कुरा कर टाटा करते हुए हँसतेहुए चली गयी.मैं भी कोलेज के लिए चल दिया. शाम को मैंनेरेखा को इंदिरा पार्क में आने के लिए कहरखा था. हमारे इलाके में इंदिरा पार्क बहुतमशहूर था. वहाँ पर लड़के लड़कयों के जोड़ेही आते थे. पार्क में घने पेड़ औरझाड़ियाँ थी जिनके पीछे छिप कर लड़केलडकियां मज़े करते थे. पार्क के केयरटेकरको सिर्फ पचास रूपए दे कर दो से तीन घंटे केलिए मज़ा लिया जा सकता था. मैं पार्क में गेट केपास रेखा का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बादरेखा आ गयी. उसने स्कूल की ड्रेस पहनी हुएथी और हाथ में भी स्कूल बैग था. वो बहुतघबराई हुई थी.आते ही बोली, रेखा: भय्या यहाँ परक्यों बुलाया? मैं: पहले अंदर चल. रेखा: ये जगहठीक नहीं है. मैं: अरे यार तू चिंता मत कर. ये कहके मैंने रेखा का हाथ पकड़ कर उसे पार्क में लेगया. केयरटेकर को रूपए दे करसमझा दिया कि उस पेड़ के पीछे कोई न आये. मैंरेखा को पेड़ के पीछे ले गया. रेखा वहाँ पर बैठगयी. मैं भी रेखा के साथ सट के बैठ गया.रेखा सकुचा रही थी. मैं धीरे धीरे रेखा की पीठसहलाने लगा. रेखा कुछ नहीं बोली. अब मैंउसकी गर्दन पर अपनी उंगलियां फेरने लगा.रेखा: भय्या प्लीज़, गुदगुदी हो रही है. मैं:तेरा तो पूरा बदन ही गुदगुदाने का मन करता है.एक पप्पी दे दे यार. रेखा: नहीं.मैंने रेखा को अपनी बाहों में खींच कर अपने होंठउसके होंठों पर सटा दिए. वो ना ना करती रही परमैंने उसकी एक ना मानी. किस करते हुए मेरे हाथउसके बूब्स पर पहुँच गए. अब मैं मस्ती से उसकेबूब्स दबाने लगा. फिर मैंने रेखा को जमीन परलिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.रेखा लगातार विरोध कर रही थी पर मैं नहीं रुका.मैंने उसकी स्कर्ट ऊपर तक उठा दी और पैंटी केऊपर से उसकी चूत सहलाने लगा. मैं लगातारउसे किस कर रहा था. अब रेखा भी गरम होनेलगी. मैंने देखा कि उसकी पैंटी गीली हो चुकी है.फिर मैंने रेखा की कमीज़ के बटन खोल दिए औरउसकी ब्रा ऊपर कर के उसके बूब्स नंगे करदिए. ओह माई गाड, क्या मस्त बूब्स थे. मैंमस्ती से रेखा के बूब्स चूसने लगा. मैंने पैंट सेअपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और रेखा केहाथ में दे दिया. रेखा को कोई अनुभव नहीं था.मैंने उसे सिखाया कि लौडे के सुपाड़ेको खोलो और बंद करो. रेखा मस्ती में मेरा लंडहिलाने लगी. मैंने रेखा की पैंटी में अपना हाथ डालदिया और उसकी चूत में उंगली डाल कर अंदरबाहर करके लगा. रेखा कसमसा उठी और जोरजोर से मेरा लंड हिलाने लगी. वो सिसकियाँ लेनेलगी.कुछ देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ. मैंनेजेब से रुमाल निकाला और अपने लंड पर लपेट केवापस रेखा के हाथों में दे दिया. मैंने रेखा से पूछा,मैं: पहले किसी लड़के से किया है? रेखा: नहीं. मैंखुशी से झूम उठा. एक कुंवारी लड़की की चूत मेंमेरी उंगली थी और उसके नन्हे कोमल हाथमेरा लंड सहला रहे थे. मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँचगया. मैं अब रेखा के बूब्स चूसने लगा. थोड़ी देरमें मैं झड़ गया. मेरा माल रुमाल में भर गया. मैंनेरुमाल से अपना लंड साफ़ किया और रेखा सेपूछा, मैं: अच्छा लगा? रेखा: हाँ. पर इस से आगेकुछ नहीं.मैं (हँसते हुए): अरे मेरी जान इसके आगेही तो मजा है. मैं तो तुझे चोद के छोडूंगा. रेखा:नहीं. मुझे डर लगता है मैं: डर मत आराम सेकरूँगा. रेखा: यहाँ? नहीं. ये जगह ठीक नहीं है. मैं(उसे बाँहों में भरते हुए): अरे मेरी जान तुझे तो मैंअपने घर में चोदुंगा. रेखा (शरारत से मेरा लंडमसलते हुए): घर में अपने बहन को चोदलेना पूजा का जिक्र आते ही मैं वासना के सागरमें डूबने लगा. पर ऊपर से बोला, मैं: नहीं यार,वो तो मेरी बहन है रेखा (मुस्कुरा कर):तो बहनचोद बन जाओ. चोद दो उसको.बेचारी वो भी तो तड़प रही है एक लंड के लिए मैं:मैं उसका सगा भाई हूँ, मैं ऐसा नहीं करसकता मैंने ऐसा बोल तो दिया पर मैं पूजा के बारेमें सोचकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया.मेरा लंड जिससे रेखा अब तक खेलरही थी वो भी तन कर खड़ा हो गया. रेखा समझगयी कि मैं अपनी बहन को चोदना चाहता हूँ औरउपर उपर से मना कर रहा हूँ. रेखा: आपका लंडकुछ और बोल रहा है, और आप कुछ और मैं चुपरहा. रेखा मेरे लंड को सहलाते हुए मेरे पासआयी और बोली, हम दोनों में से किसके बूब्सआपको अच्छे लगते हैं? मैं: दोनों के रेखा:तो वादा करो कि पूजा को पहले चोदोगे, फिर मैंभी आप से चुदवाउंगी. रेखा मुझे मना लेती है. औरवादा करती है कि पूजा को भी मना लेगी.रेखा हमारे अफेयर के बारे में पूजा को बता देती हैऔर ये भी बताती है कि मैंपूजा को चोदना चाहता हूँ. पर पूजा यह बातनहीं मानती. रेखा उसे तरह तरह से मेरे साथसेक्स करने के लिए उकसाती है.इस पर पूजा एक शर्त रख देती है कि वो पहलेअपने भाई से चुदवाए. रेखा का भाई कमल एकशरीफ लड़का है और मेरा पक्का दोस्त है. रेखा येबात मुझे बताती है. मैं और रेखा एक प्लान बनातेहैं. जब ममी पापा घर पर नहीं थे और पूजा स्कूलगयी थी तब रेखा बंक मार कर मेरे घर आजाती है. मैं उसके चेहरे पर मास्क लगा देता हूँ.फिर उसे एक कमरे में छुपा देता हूँ. उस कमरे मेंकैमरा फिट कर देता हूँ. मैं प्लान के मुताबिक़कमल को बुला कर उसे बीयर पीला देता हूँ औरइसे लड़की चोदने के लिए उत्तेजित कर देता हूँ.कमल अपने लंड को मसलने लगता है औरबोलता है यार किसी लड़की की चूत मिल जाएतो मज़ा आ जाए. फिर मैं उसे बताता हूँ कि एकलड़की है पर अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहती.कमल बोलता है कि यार चेहरे का क्या करना है,बस चूची दबाने को और चूत चुदाई के लिए मिलजाये तो मज़ा आ जाए. कमल को मैं उस कमरे मेंले कर आता हूँ जिस में रेखा छुपी हुई थी.रेखा पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी. कमल उसेदेखते ही उतेजित हो जाता है और उस पर टूटपड़ता है. इस तरह से वो अपनी बहन को अनजानेमें ही चोद डालता है. रेखा कैमरेकी वीडियो पूजा को दिखा देती है. रेखा हैरानहो जाती है और फिर मुझसे चुदने के लिए मानजाती है. अब मैं पूजा को चोदने का प्लान बनानेलगा. हम दोनों मन ही मन एक दुसरे को पसंदकरते थे और एक दूसरे से प्यार करते थे, पर घरपर मौका नहीं मिल पा रहा था. मैंने नोटकिया कि आजकल पूजा घर पर कपड़ों परज्यादा ध्यान नहीं देती थी. बहुत बार वो ऐसेबैठती थी की उसकी कछी तक नज़र आजाती थी जिसे देख कर मेरा लंड फनफना करखड़ा हो जाता था. मैं उसे देख कर कई बार बाथरूम में मुठ मार लेता था. अक्सर खेल खेल में मेंउसकी चुची को छू लेता था या चूतड़दबा देता था. मेरी इच्छा उसको चोदने के लिएबढ़ती ही जा रही थी. एक बार मेरेमम्मी डैडी मामा के घर गए हुए थे और हमदोनों घर पर अकेले थे.मैंने अपनी हरकतें फिर से शुरू कर दीं जैसेकि उसके बूब्स को हाथ लगाना और बात बातपर उसके चूतड़ सहला देना. पूजा जानबूझकरभी अनजान बनने का नाटक करती रही. उस शामको मैंने एक बहुत ही हॉट पिक्चर देखी और मैंबहुत गरम हो गया. घर आकर मैंने सारे कपड़ेउतार दिए और एक पजामा पहन लिया. मैंनेदेखा कि मेरी प्यारी बहना स्कर्ट और टॉप पहनकर सोई हुई है. क्योंकी मम्मी डैडी मामा के घरदो दिन के लिए गए हुए थे, घर पर हम दोनों केअलावा कोई नहीं था. मैंने मौकेका पूरा फायदा उठाने की सोची. मैं धीरे से उसकेपास गया और उसको पुकारा पूजा...उसने कोईजवाब नहीं दिया. वो शायद गहरी नींद में सोई हुईथी. उसके हलके खर्राटे की आवाज़ सेकमरा गूँज रहा था. मैं चुपचाप उसके पास आ करबैठ गया और उसके शरीर को देखता रहा.उसकी स्कर्ट थोड़ा उपर की ओरहो गयी थी और उसकी गोरी गोरी टाँगें और जाँघेंचमक रही थीं. मेरा लंड बुरी तरह से खड़ा हो गया.मुझसे रहा नहीं गया. मैं धीरे धीरे उसकी टाँगेंसहलाने लगा. फिर मेरा हाथ उसकी जाँघों पररेंगने लगा. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. डरते डरतेमैंने पूजा के बूब्स भी सहला दिए. इन सबसेबेखबर मेरी प्यारी सेक्सी बहना गहरी नींद मेंसोई हुई थी. फिर मैंने पूजा की स्कर्ट पूरी ऊपरतक उठा दी. उसने वाईट रंग की पैंटी पहनरखी थी. मैं उसकी चूत को पैंटी के ऊपर सेसहलाने लगा.मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. उस वक्त मैंनेसिर्फ पजामा पहना हुआ था और उसके नीचेअंडर वीयर भी नहीं पहना हुआ था. मैंनेअपना पजामा उतार दिया और पूरा नंगा होकरलंड को हाथ में लेकर मसलने लगा. फिर मैंनेउसकी पैंटी के साईड से उसकी चूत मेंऊँगली करने लगा. इससे मेरी बहन जाग गयी.वो घबरा कर बोली, हाय भैया ये आप क्या कररहे हैं? आपको अपनी बहन के साथ ऐसा करतेहुए शर्म नहीं आती? मैं कुछ नहीं बोल पाया. फिरपूजा का ध्यान मेरे खड़े हुए लंड पर गया.वो हैरानी से उसे देखने लगी. मेरी घबराहट में लंडसिकुड़ गया और बहुत छोटा सा रह गया.वो बोली अरे भैया ये बड़े से इतना छोटा कैसेहो गया? मेरी बहन के मेरे लंड की तरफ देखने सेमेरा लंड फिर खड़ा हो गया. अबतो पूजा की हैरानी की सीमा न रही. मैंनेअपना तन्नाता हुआ लंड उसके हाथ मेंपकड़ा दिया और कहा लो इससे खेलो.थोड़ा हिचकिचाने के बाद मेरी बहन ने मेरा लंडपकड़ लिया और उसको हिलाने लगी.वो काँपती आवाज़ में बोली भैय्या कोई आजाएगा तो?मैं बोला, पगली रात को कौन आएगा? चल मिलकर मज़ा करते हैं. अब वो कुछ नहीं बोली औरउसने अपना मुहं मेरी छाती में छुपा लिया. मैंउसके मुम्मे दबाने लगा. पूजा के नाज़ुकहोंठों को मैं अब चूसने लगा. अबवो सी सी सीत्कार करने लगी और हाय भय्या,जरा धीरे से......ओह मज़ा आरहा है.....जैसी कामुक आवाजें निकलने लगी. उसेखड़ा करके मैंने उसकी टी शर्ट उतार दी. उसनेनीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई थी. हायदोस्तों क्या बताऊँ अपनी बहनकी नंगी चुची देख कर मैं जैसे पागल सा हो गया.उधर मेरी बहन शर्म से लाल हुई जा रही थी औरउसने अपनी चुचियों को दोनों हाथों से ढकरखा था. मैंने धीरे से उसकी स्कर्ट भी खोल दी.अब वो सिर्फ वाईट रंग की पैंटी में मेरे सामनेखड़ी थी. मैंने उसे अपने साथ चिपटा लिया औरउसके लिप्स पर किस करने लगा. मैंने बड़े प्यारसे अपनी बहन के दोनों हाथ उसकी चुचियों सेहटाये और उनको देखने लगा.कमरे में लाइट नहीं जल रही थी औरथोड़ी सी रौशनी बहार के लेंपपोस्ट से आरही थी. इस हलकी रौशनी मेंपूजा का सेक्सी बदन दूध की तरह चमक रहा था.मैंने हाथ बढ़ा कर पास में लाइट का स्विच ऑनकर दिया. पूजा बुरी तरह से शर्मा कर अपनेबदन को सिकोड़ कर बेड पर बैठ गयी और बोली,प्लीज़ भय्या, लाइट बंद कर दो, मुझे बहुत शर्मआ रही है. मैं मुस्कुराता हुआ आगे बढ़ा औरबोला, प्यारी बहना शर्माओ मत आज मुझेजी भर के देखने दो. हाय तुम्हारा ये बदनसंगमरमर के जैसा है. तुमइतनी सेक्सी हो की कोई भी तुम्हें देख केदीवाना हो जाए. मैं उसकी पीठ सहला रहा था.उसके रेशम जैसे बाल उसकी चेहरे औरछाती को ढके हुए थे. मैंने उसकी जुल्फों को चेहरेसे हटाया और उसके लिप्स पर किस करने लगा.फिर मैंने दोनों हाथ उसकी चुचियों से हटाये औरउनको दबाने लगा. पूजा के निप्प्ल तने हुए थे.मैंने एक एक करके उसके निप्पल को चूसना शुरूकर दिया. मेरी बहन मस्त हो गयी और मेरे लंडको पकड़ कर उसे आगे पीछे करने लगी. मैं बेड केकिनारे पर खड़ा हो गया औरअपना फनफनाता हुआ लंड उसके मुहं के पास लेजा कर मैंने उसके होठों को छुआया.पूजा लिपस्टिक की तरह मेरे लंड के सुपाड़ेको अपने नाज़ुक होठों पर फेरने लगी.मैंने कहा, इसे मुहं में ले लो और चूसो. मेरी बहन नेबड़े प्यार से मेरे लंड का सुपाड़ा मुहं में लेलिया और चूसने लगी. आह दोस्तों उस वक्त मैंसातवें आसमान पर पहुँच गया. इतना मज़ा आरहा था की मैं क्या बतायूं. मेरा लंडमेरी प्यारी सेक्सी बहन के मुहं में अंदर बाहरहो रहा था. उस वक्त मैं उसके संतरे के साईज़ केमुम्मे दबा रहा था. लंड चूसते हुए मेरी सगी बहनपूजा क्या मस्त लग रही थी. बार बार उसकेचेहरे पर जुल्फें आ जाती थीं जिनको मैं पीछे करके उसके सुन्दर चेहरे को देख कर अपना लंड उससे चुसवा रहा था और जोश में आकर बोलरहा था हाय चूसो मेरी प्यारी बहना. अंदर तकलो. बड़ा मज़ा आ रहा है आ....आ....आ....आ...हमैंने फिर उसे खड़ा किया और अपने सीने सेचिपटा लिया.उसके मुम्मे मेरी छाती से दबे हुए थे. मैं उसके होंठचूस रहा था और मेरे दोनों हाथ उसकेचूतड़ों को पैंटी के अंदर हाथ डाल करदबा रहा था. मैंने धीरे से उसकी पैंटी नीचेसरका दी. पूजा वासना में बेसुध सी होकरमेरी बाहों में नंगी खड़ी थी पर पैंटी नीचे खिसकतेही जैसे वो होश में आई - नहीं भैय्या नीचे कुछमत करना. मैंने उसकी न सुनते हुएउसकी पैंटी घुटनों तक नीचे कर दी और साथही उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकरउसकी आँखों में आँखें डालकर पूछा - तू मुझेप्यार करती है या नहीं? इस परमेरी प्यारी बहना बोली - मैं आपकी अपनी जानसे भी ज्यादा प्यार करती हूँ. मैं उसकी चूत मेंउंगली डाल कर बोला - तो मेरी प्यारी बहन,अपनी चूत मुझे दे दे.पूजा: हाय भैय्या मुझे डर लगता है. सुना है, बहुतदर्द होता है.मैं (प्यार से उसकी चुची मसले हुए): मैंतेरा सगा भाई हूँ, तुझे कोई दर्द नहीं दूँगा.पूजा (मेरा लंड पकड़ते हुए): पर भैय्या येतो बहुत बड़ा है.मैं: चिंता मत कर, चूत में से तो बच्चा भी निकलआता है, फिर इस लंड की क्या बिसात?पूजा (हँसते हुए): तो आप आज बहनचोद बनकेही रहोगे?मैं पूजा के मुहं से पहली बार गाली सुनकर औरभी उत्तेजित हो गया और बोला:हाँ मेरी प्यारी बहना, तेरी चूत मैं मारूंगा औरजी भर के तुझे चोदुंगा.पूजा जो थोड़ी देर पहले शर्म सेमरी जा रही थी अब खुल कर गन्दी गन्दी बातेंकरने लगी. उसने मेरा लंड पकड़ा और कमरे सेबाहर की ओर जाने लगी. मेरे लंड के साथ मैंभी उसके पीछे पीछे चल पड़ा. वो एकअलमारी के पास गई और मुझेइशारा किया उसको खोलने के लिए. अंदरवोदका की बोतल थी जो मेरेपापा कभी कभी पीते थे. मैंने पीछे से उसके चूतड़दबाए और पूछा - तो पीने का मन कर रहा है?पूजा: थोड़ा डर कम हो जाए इसलिए, वर्ना मैंनेकसम से भय्या कभी नहीं पी.मैं: तू इतना डरती क्यों है?पूजा: आपसे नहीं डरती, आपके लंड से डरती हूँ.देखो न छोटा होने का नाम ही नहीं ले रहा.पूजा की बात सही थी. रात के ग्यारह बज चुके थेऔर हमें लगभग तीन घंटे एक साथ एक दूसरे केनंगे बदन से खेल रहे थे. अब तक मेरी सगी बहनमेरे से बहुत खुल चुकी थी. हालांकि हमने चुदाईनहीं की थी, लेकिन पूजा दो बार झड़चुकी थी और मैं एक बार अपना सारा वीर्य उसेपिला चुका था. हम दोनों ने वोदका का एक एकपेग ले लिया. पूजा अब बहुत सुंदर औरसेक्सी लग रही थी. मैं उसे बहुत नज़दीक सेमहसूस कर रहा था. मैंने प्यार सेअपनी बहना को बेड पर लिटा दिया और उसकेउपर चढ़ गया. मैंने अपनी जीभ उसके मुहं में डालदी और किस करने लगा. उसके मुम्मे मेरी छाती मेंदबे हुए थे. मेरा लंड बार बार उसकी चूत सेटकरा रहा था. मैंने उसके दोनों टांगें चौड़ी करदीं और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत परटिका दिया. अआआह क्या मज़ा आरहा था दोस्तो. मैंने धीरे धीरे पूजा की चूत मेंअपना लंड पेलना शुरू किया. पूजा की चूतकाफी गीली थी और मेरा आधा लंड उसमें घुसगया. अब मेरी बहना को थोड़ी तकलीफ होनेलगी. पर वोदका का नशा उस पे हावी था. मैंनेअपना लंड थोडा सा बाहर निकाला और एकझटके में सारा अंदर डाल दिया. पूजा के मुंह सेघुटी घुटी सी चीखें निकलने लगीं. पर मेरे लिप्सउसके लिप्स से सटे हुए थे इसलिए कोई आवाज़बाहर नहीं निकल सकी. मैं दना दनअपनी बहना की कुंवारी चूत में अपना लंड अंदरबाहर कर रहा था. पूजा घुटी घुटी चीखें निकालरही थी. थोड़ी देर बादमेरी प्यारी बहना को भी मज़ा आने लगा औरवो भी चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे साथ चुदाईका मज़ा लेने लगी.पूजा: आह भय्या मज़ा आ गया औरतेज..........जोर से ..........ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.मई (हाँफते हुए): हाय क्या मस्त चूत है यारतेरी.....अह्ह्ह पूजा.....मेरी बहन.....आज से तूमेरी है.....पूजा: हाँ भय्या.....आज से मैं आपकी हूँ.......मुझेरोज चोदा करोगे?मैं: ये भी कोई ना कहने वाली बात है?मेरे धक्के और तेज होते चले गए और कुछ देर मेंही हम दोनों भाई बहन झड़ गए. मैं हाँफते हुएपूजा के उपर ही लेट गया. थोड़ी देर बाद हमदोनों ने उठकर एक साथ शोवर के नीचे स्नानकिया. पूजा की चूत से काफी खून निकला था.हमने चादर रात को ही धो दी. और उसके बाद नंगेही एक दुसरे से लिपट कर सो गए.अगले दिन पूजा नें हमारी चुदाई की सारी बातरेखा को बता दी. मैं अब जबभी मौका मिलता तो पूजा को चोद लेता था. परहम लोगों को घर में चांस बहुत कम मिलता था.मेरी पूजा को चोदनेकी इच्छा बढ़ती जा रही थी पर घर पर सब लोगहोने की वजह से हम चुदाई नहीं कर पाते थे. फिरमैंने रेखा के भाई कमल को भी अपने ग्रुप में लेनेका प्लान बनाया. मैंने कमल से कहा कि यारआजकल चुदाई करने का बहुत मन करता है.कमल बोला, उस लड़की को बुला जिस के साथतुने मेरे साथ चुदाई करवाई थी. मैं हंस करबहाना बना कर बोला कि वो अपने गाँवचली गयी है. कमल का भी बहुत मन कर रहा था.मैंने उससे कहा कि यार एक काम करते हैं. तूमेरी बहन से सेक्स कर ले और मैं तेरी बहन सेसेक्स कर लेता हूँ. ये सुन कर कमल भड़कगया और गुस्से से बोला, साले तेरी इतनी हिम्मतकैसे हुई मेरी बहन के बारे में ऐसा बोलने की.दोस्ती इसको कहते हैं? मादरचोद, मेरी बहन परबुरी नजर डालता है? कमल नें मुझे औरभी बुरा भला कहा. पर मैं शांती सेउसकी सुना रहा.कमल और मैं बचपन के दोस्त थे और एक दुसरेको अच्छी तरह से समझते थे. कमल मेरी बहनको सगी बहन की तरह से प्यार करता था औरहर साल उस से राखी भी बंधवाता था.उसका गुस्सा जायज़ था. मैंने कमलको समझाया, यार देख हमारी दोनों बहनें जवानहो चुकी है. उनको भी तो चुदाईकी इच्छा होती होगी? वो बाहर कहीं मुहं मारेंतो क्या तुझे अच्छा लगेगा? कमल गुस्से मेंभन्नाया बैठा रहा. मैंने कमल को बहुतसमझाया बुझाया और दो बीयर पिलाने के बादकमल के मन में ये बात बैठा दी कि यही एकआसान सा रास्ता है जिससे हम मज़ा भी करसकते हैं और घर की बात घर में ही रहेगी. फिर मैंनेउसे पूजा के बारे में उसेबताया कि वो कितनी सेक्सी है. उसके बूब्स,चिकनी चूत और गोल गोल चूतड़......ये सब सुनकर कमल गर्म हो गया और वासना सेअपना लंड मसलने लगा. मैं बोला कि अगर मुझेमौका मिल जाए तो मैंभी पूजा को चोदना चाहता हूँ.कमल हैरानी से मुहं फाड़े मुझे देखने लगा.वो बोला, तू पागल तो नहीं हो गया? मैं हंस करबेशर्मी से बोला, साले तू नहीं समझेगा. तुनेकभी मेरी बहन पूजा के हुस्न के बारे में सोचा है?उसकी मस्त चुचियाँ, जांघें, गोरा गोरा बदन औरचिकनी चूत देखी है? एक बार उसे नंगी देखलेगा तो तेरा लौड़ा उसे सलाम करने लगेगा.मेरा तो लंड उसे देख कर रोज खड़ा हो जाता हैऔर मैं उसके नाम की रोज मुठ भी मारता हूँ.वो तो मुझे मौका नहीं मिल रहा वरना मैं कब तकउसे चोद चुका होता (मैंने जान बूझकर कमलको नहीं बताया कि

यह मेरी पहली कहानी है। जब मेरी उम्र 18साल की थी, मैं अपने गाँव में शादी मेंगया हुआ था। वहां पर रजनी भी आई हुईथी लेकिन उससे मेरी कभी बात नहीं होती थी।उसके स्तन मुझे बहुत हो प्यारे लगते थेजो मैंने नहाते समय देख लिए थे- जबवो नहाने के लिए बाथरूम में गई तो थोड़ी देरबाद में ही घुस गया क्योंकि बाथरूम के गेट मेंकुण्डी नहीं थी वो केवल पैंटी में ही थी।मई का महीना चल रहा था, गर्मियों के दिनथे। सभी लोग रात में छत पर सोते थे। घर मेंभी मेहमान आये हुए थे। एक दिनरजनी अनजाने में मेरे बगल में आकर लेट गई।तब रात के 11 बज रहे थे, मुझे अब नींदनहीं आ रही थी। एक बज चुका था, सभी लोगसो चुके थे, वो भी सो गई थी। उसने फ़्रॉकपहनी हुई थी और सोते समय उसकी फ़्रॉककाफी ऊपर आ गई थी। अब उसे देख करमेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने डरते हुएउसकी पैंटी को छुआ तो कोई हलचल नहीं हुईक्योंकि वो सो रही थी। अब मेरी हिम्मत औरबढ़ गई। अब मैंने उसकी चूत को पैन्टी केऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी कोईप्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसकी पैन्टी केअन्दर हाथ डाला। उसकी चूत के ऊपर बालथे। अब मैं उसकी चूत को सहला रहा था औरउसके छेद में ऊँगली डालने की कोशिश कररहा था लेकिन उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।तभी उसने एकदम करवट ली, मैं एकदम डरगया और सोने का नाटक करने लगा। लेकिनवो अब भी सो ही रही थी। थोड़ी देर बाद मैं मुठमार कर सो गया।सुबह जब मेरी नींद खुली तो वो मुझसे पहलेउठ चुकी थी। अब मेरा दिन नहीं कटरहा था और रात का इंतजार कर रहा था।जब रात हुई तो वो कल की तरह ही सोने केलिए आई लेकिन उसके और मेरे बीच में मेरेताउजी की बेटी राधा आकर लेट गई।राधा मुझसे एक साल बड़ी थी। मैं रातको सोना नहीं चाहता था।रजनी सो चुकी थी और राधा भी।तभी मैंने राधा के ऊपर से हाथ डाल कर जैसेही रजनी को छुआ तो राधा के स्तन मेरे हाथसे दब रहे थे। इसी वजह से राधा की नींद खुलगई और वो सोने का नाटक करने लगी थी।अब मैंने जैसे ही रजनी की पैन्टी में हाथडाला तो राधा ने अपनी आँखे खोल दी। उसेजगता देखकर मैं डर गया लेकिन उसने कुछनहीं कहा और थोड़ी देर बाद वो उठकरमेरी दूसरी तरफ आ गई अब मैं समझगया कि वो क्या कहना चाहती है। उसनेमेरा रास्ता साफ कर दिया। अब मैं आसानी सेरजनी की चूत सहला रहा था।लेकिन थोड़ी देर बाद राधा ने अपना हाथ मेरेलंड के ऊपर रख दिया। मुझे यह समझते देरनहीं लगी कि वो क्या चाहती है। अबराधा मुझसे चिपक गई थी और वो काफी गरमलग रही थी। उसने अपना कमीज़ खुद ही ऊपरकर दिया लेकिन वो मेरी बहन थी इसलिए मुझेबहुत डर लग रहा था। पर उस वक्त मुझे केवलचूत ही दिख रही थी। मैं राधा की चूतको सलवार के ऊपर से सहला रहा था औरउसके स्तन चूस रहा था क्योंकि उसनेअपना कुर्ता खुद ही ऊपर कर लिया था।थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवारका नाड़ा खोला तो राधा नेपैन्टी नहीं पहनी थी। उसने कहा कि वो सूट केसाथ पैन्टी नहीं पहनती है। उसकी भी चूत परबहुत बाल थे। अब मैं उसकी चूत के दानेको सहला रहा था, बीच बीच मैं उसके छेद मेंउंगली भी डाल देता था। उसकी चूतरजनी की तरह कसी हुई नहीं थी। तो उसनेबताया कि वो चुपचाप मोमबत्ती अन्दरडालती थी।थोड़ी देर बाद उसकी चूत में से पानी निकलनेलगा। अब उसने मुझसे कहा कि उसकी चूतको अब लंड की जरुरत है।राधा ने अपनी सलवार और नीची कर दी औरअब मैं उसके ऊपर था और अपना लंडउसकी चूत पर रगड़ रहा था लेकिन वो बहुतही उतावली हो रही थी चुदने के लिए !मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला तो उसकेमुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह की आवाजनिकली और मैं उसको लगातार चोदने मेंलगा हुआ था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई औरमैंने भी अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़दिया। फिर हम लोगों ने अपने कपड़े सही कियेऔर बातें करने लगे। रात के तीन बज चुके थे।अचानक रजनी ने करवट बदली औरउसका एक पैर मेरे ऊपर था वो भी बहुत गरमहो रही थी। मैंने फिर रजनी की चूतको सहलाना शुरू कर दिया।तब राधा ने कहा- मैं तुझे रजनी की चूतभी दिलवाऊंगी।अब तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न था। थोड़ी देरतक हम लोग चूमा-चाटी करके सो गए।सुबह राधा ने मुझे कहा- मैं रजनी को दोपहर मेंऊपर के कमरे में ले आऊअगी और तुम कमरे मेंछुप जाना। जब मैं इशारा करूं तो तुम बाहरनिकल आना !वही हुआ। दोपहर में मैं कमरे में छुपगया तो वो दोनों कपड़े बदलने लगी। यह सबराधा का नाटक था।उसने रजनी को कहा- हमें कहीं जाना हैइसीलिए ऊपर कमरे में कपड़े बदल ले !जब रजनी ने अपने कपड़े उतारे तो मैंउसका बदन देखकर दंग रह गया।उसका शरीर तो मानो एकदम मक्खन की तरहलग रहा था। वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी मेंही थी।तभी राधा ने उसकी एक चूची को दबा किया।इस पर उसने भी राधा की दोनों चूचियां मसलदी। राधा तो यही चाहती थी कि रजनी यह सबकरे।अब वो दोनों एक दूसरे के स्तनदबा रही थी कि तभी राधा नेरजनी की पैन्टी उतार दी और खुदभी नंगी हो गई। अब वो दोनों एक दूसरे की चूतमें ऊँगली डाल रही थी।तभी रजनी ने कहा- काश ! यहाँ कोईलड़का होता तो कितने मजे आते !तो राधा ने मुझे इशारा किया तो मैं बाहर आगया। मुझे वह देखकर रजनी को शर्म आनेलगी और अपनी चूत को अपने हाथों से छुपानेलगी। लेकिन तब तक वो मेरी बाहों में थी औरमैं उसको गालों और होंठों को चूम रहा था।मेरा एक हाथ रजनी के वक्ष पर था औरदूसरा उसकी चूत पर !उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैं समझगया कि वो चुदाने के लिए तैयार है।अब मैंने उसको बेड पर लिटाया औरउसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा। फिर जैसेही मैंने अपने लंडको झटका दिया तो वो थोड़ा सा उसकी चूत मेंचला गया। वो रोने लगी और बोली- प्लीज,बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा है !मैं उसकी एक नहीं सुन रहा था। थोड़ी देर मेंमेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। मैं बिल्कुलशांत था ताकि उसका दर्द कुछ कम हो जाये।जब वो कुछ शांत हुई तो मैंनेउसको चोदना शुरू किया। उसे भी अबअच्छा लग रहा था। राधा भी अपनी चूत मेंउंगली डाल के शांत हो गई थी।थोड़ी देर में मैंने वीर्य से उसकी चूत भरदी थी। जब मैंने देखा तो वहाँ पर खूनपड़ा था और रजनी की चूत भी खून से लालथी।राधा ने बाद में यह सब साफ किया।फिर जब भी मौका मिलता तो मैं अपनी बहनराधा की चुदाई करता।2-3 दिन में रजनी अपने घरजा चुकी थी लेकिन उसको मैंने 3-4 बार चोदलिया था।हम लोग भी अपने घर पर आ गए। राधा औरमेरा चुदाई का सिलसिला आज भी है।आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी?

दोस्तो प्यारी भरी कहानियो मे आपका स्वागत है |