Sunday, 17 November 2013

ये बिल्कुल ही सच्ची कहानी है मेरी चचेरी बहनगांव से अपनी पढ़ाई के लिए हम लोगो के पासशहर मे आई थी। उस समय वो इंटर मे दाख़िलेके लिये आई थी और मैं ग्रेजुएशन मे था। हमलोग शुरू से शहर में रहते थे। मेरेपिताजी सरकारी नौकरी मे थे। मैं घर मे सबसेछोटा हूँ। मेरी बहन मुझसे छोटी थी क़रीब 5साल की थी। शुरू मे तो ऐसा कोई ख़्यालनही आया, मगर धीरे धीरे मन सेक्स की तरफ़होने लगा। हम लोगो का कमरा छोटा था औरहमलोग सब एक ही बेड पर सोते थे। मैं अक्सरअपनी बहन के बगल मे सोया करता था। रात मेसोते समय मेरे हाथ उसके पेट को छूते थे। मुझेतो आकर्षण महसूस होता था मगर उसके बारेमे मुझे कुछ पता नही चल पाता था।एक दिन मैंने उसके स्तन को छुआ तो उसनेथोड़ा विरोध किया मैंने तुरत अपना हाथहटा लिया। फिर मैंने एक बार कोशिश की लेकिनफिर से हटा दिया मगर कुछ बोला नही मुझेभी डर लग रहा था क्योंकि मेरी मा औरमेरी अपनी दोनो बहन भी बगल मे सोई हुई थी।दूसरे दिन मैंने फिर से कोशिश की इस बार मैंनेउसके स्तन को तोड़ा ज़ोर से प्रेस किया इसबार उसकी थोड़ी सहमति थी मैंने धीरे धीरेकाफ़ी देर तक प्रेस किया शायद उसे भी आनंदआ रहा था। ये कार्यक्रम काफ़ी दिनो तकचला। एक दिन उसने मुझसे पूछा की आपऐसा क्यों करते है तो मैंने बोला की क्यों तुम्हेपसंद नही है तो उसने कहा नही ऐसी कोई बातनही मगर किसी को पता चलेगा तो क्या होगा।तब मैंने कहा किसी को पता नही चलेगा। तुमसाथ दो तो कुछ नही होगा। फिर उसनेहामी भरी। अब हम लोग घर मे किसी केनही रहने का इंतज़ार करने लगे और येमौक़ा भी हमे जल्द ही मिल गया और मैंनेकहा की अब मैं कुछ और टेस्ट करना चाहता हूँ।तो उसने पूछा क्या तो मैंने कहा, मैंतुम्हरा स्तन देखना चाहता हूँ उसने पहलेतो मना किया फिर थोड़ी देर मे हामी भरदी तो मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया और फिरमैंने धीरे से से उसके सलवार को उपरकिया और उसके ब्रा को उपरकिया तो देखा की दो गोल गोल स्तन मेरे सामनेथे जो की मैंने पहले कभी नही देखा था और फिरमैंने अपने दोनो हाथों से उसको दबाना शुरू करदिया शायद उसे भी अच्छा लग रहा था औरवो ज़्यादा ही उत्तेजित हो रही थी। फिरकाफ़ी दिनों तक चलता रहा मगर असली प्यासअभी नही बुझी थी और मेरा मन उसको चोदनेको करने लगा।एक दिन मैंने कहा की ये सबकाफ़ी हो गया क्यों ना ज़िंदगी की असली मज़ा लिया जाएतो उसने कहा - क्या ? तो मैंनेकहा ज़िंदगी की सुख तो चुदाई मे ही हैं जो कि हरआदमी और औरत की ज़रूरत है। तब उसनेकहा इसमे कोई रिस्क तो नही है ?मैंने कहा- नहीं, सावधानी के साथ करेंगे। मगरपता नही उसे काफ़ी डर लग रहा था औरहिम्मत नही जुटा पा रही थी। काफ़ी समझाने केबाद उसे विश्वास हो गया और उसने हामी भरदी और हमलोग एकांत का इंतेज़ार करने लगेऔर एक दिन हमे मौक़ा मिल गया जबमेरी मां और बहन बाज़ार गये और हम दोनो घरमे अकेले थे तब मैंनेकहा क्यों ना अपनी ज़िंदगी की प्यासभुझा ले।।उसने दबी ज़ुबान मे हां कही और फिर मैंने धीरेधीरे उसके सलवार औरपायजामा को खोला अब वो ब्रा और पेण्टी मेमेरे सामने थी उसका बदनतो मानो अप्सरा का बदन लग रहा था औरशर्मा रही थी और अपने चेहरेको अपनी हाथों से ढके हुई थी फिर मैंने धीरे सेअपने कपड़े को उतारा और उसके स्तन को धीरेधीरे दबाना शुरू किया शायद उसे अच्छा लगरहा था अब मैंने उसके ब्रा को खोल दिया औरमेरे सामने उसके संतरे जैसे दो चीज़ आ गई औरमैंने अपने मुह से उसके स्तन को चूसना शुरूकिया ये अहसास उसे अच्छा लग रहा था औरवो ज़यादा उत्तेजित हो रही थी और मैं भी अबकाफ़ी उत्तेजित होने लगा था।फिर मैंने उसके पेण्टी को उतार दिया अब मेरेसामने मानो जैसे दुनिया की सबसी बड़ी चीज़नज़र आ रही थी क्योंकि अभी तक मैंनेकिसी भी लड़की को ऐसे नही देखा था। अब मैंनेअपने लंड को उसके मुंह मे दे दिया। पहलेतो उसने मना किया काफ़ी मनाने के बादवो मान गई और मेरे लंड को चूसना शुरू करदिया मैं तो मानो की सातवे आसमान मे सफ़रकर रहा था उस अहसास का बयान मैं नही करसकता की मैं कैसा महसूस कर रहा था। उसकेचूसने से मेरा लंड काफ़ी टाईट हो गया और मैंनेइसे उसके बुर मे धीरे धीरे डालना शुरू किया उसेकाफ़ी तकलीफ़ महसूस हो रही थी।पहली बार किसी मर्द के लंड उसके बुर मेजो जा रहा था। मैंने उसकी तकलीफ़ को समझतेहुए धीरे धीरे लंड को अंदर डाला अब तो उसेभी मज़ा आने लगा और थोड़ा ऊऊऊ आआआईईई के आवाज़ के साथवो पूरा मज़ा लेना चाहती थी और मैं भी इसमौक़े को छोड़ना नही चाहता था और हमलोगो नेक़रीब 1 घंटे तकअपनी जवानी का मज़ा लिया लेकिन इसके बादहम दोनों की चाहत बढ़ती गई और हम लोग रातमे भी ये काम सबसे बचते हुए करने लगे और घरमे कोई ना हो तो फिर क्या कहना। इस तरह सेहमलोगो ने क़रीब 7 साल तकअपनी जवानी का मज़ा लेते रहे। अबउसकी शादी हो चुकी है मगर मैंअभी भी कुंवारा हूँ और उन दिनों के बारे मेसोचकर आज भी दिल रोमांचित हो जाता है।

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