Sunday, 17 November 2013

यह मेरी पहली कहानी है। जब मेरी उम्र 18साल की थी, मैं अपने गाँव में शादी मेंगया हुआ था। वहां पर रजनी भी आई हुईथी लेकिन उससे मेरी कभी बात नहीं होती थी।उसके स्तन मुझे बहुत हो प्यारे लगते थेजो मैंने नहाते समय देख लिए थे- जबवो नहाने के लिए बाथरूम में गई तो थोड़ी देरबाद में ही घुस गया क्योंकि बाथरूम के गेट मेंकुण्डी नहीं थी वो केवल पैंटी में ही थी।मई का महीना चल रहा था, गर्मियों के दिनथे। सभी लोग रात में छत पर सोते थे। घर मेंभी मेहमान आये हुए थे। एक दिनरजनी अनजाने में मेरे बगल में आकर लेट गई।तब रात के 11 बज रहे थे, मुझे अब नींदनहीं आ रही थी। एक बज चुका था, सभी लोगसो चुके थे, वो भी सो गई थी। उसने फ़्रॉकपहनी हुई थी और सोते समय उसकी फ़्रॉककाफी ऊपर आ गई थी। अब उसे देख करमेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने डरते हुएउसकी पैंटी को छुआ तो कोई हलचल नहीं हुईक्योंकि वो सो रही थी। अब मेरी हिम्मत औरबढ़ गई। अब मैंने उसकी चूत को पैन्टी केऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी कोईप्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसकी पैन्टी केअन्दर हाथ डाला। उसकी चूत के ऊपर बालथे। अब मैं उसकी चूत को सहला रहा था औरउसके छेद में ऊँगली डालने की कोशिश कररहा था लेकिन उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।तभी उसने एकदम करवट ली, मैं एकदम डरगया और सोने का नाटक करने लगा। लेकिनवो अब भी सो ही रही थी। थोड़ी देर बाद मैं मुठमार कर सो गया।सुबह जब मेरी नींद खुली तो वो मुझसे पहलेउठ चुकी थी। अब मेरा दिन नहीं कटरहा था और रात का इंतजार कर रहा था।जब रात हुई तो वो कल की तरह ही सोने केलिए आई लेकिन उसके और मेरे बीच में मेरेताउजी की बेटी राधा आकर लेट गई।राधा मुझसे एक साल बड़ी थी। मैं रातको सोना नहीं चाहता था।रजनी सो चुकी थी और राधा भी।तभी मैंने राधा के ऊपर से हाथ डाल कर जैसेही रजनी को छुआ तो राधा के स्तन मेरे हाथसे दब रहे थे। इसी वजह से राधा की नींद खुलगई और वो सोने का नाटक करने लगी थी।अब मैंने जैसे ही रजनी की पैन्टी में हाथडाला तो राधा ने अपनी आँखे खोल दी। उसेजगता देखकर मैं डर गया लेकिन उसने कुछनहीं कहा और थोड़ी देर बाद वो उठकरमेरी दूसरी तरफ आ गई अब मैं समझगया कि वो क्या कहना चाहती है। उसनेमेरा रास्ता साफ कर दिया। अब मैं आसानी सेरजनी की चूत सहला रहा था।लेकिन थोड़ी देर बाद राधा ने अपना हाथ मेरेलंड के ऊपर रख दिया। मुझे यह समझते देरनहीं लगी कि वो क्या चाहती है। अबराधा मुझसे चिपक गई थी और वो काफी गरमलग रही थी। उसने अपना कमीज़ खुद ही ऊपरकर दिया लेकिन वो मेरी बहन थी इसलिए मुझेबहुत डर लग रहा था। पर उस वक्त मुझे केवलचूत ही दिख रही थी। मैं राधा की चूतको सलवार के ऊपर से सहला रहा था औरउसके स्तन चूस रहा था क्योंकि उसनेअपना कुर्ता खुद ही ऊपर कर लिया था।थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवारका नाड़ा खोला तो राधा नेपैन्टी नहीं पहनी थी। उसने कहा कि वो सूट केसाथ पैन्टी नहीं पहनती है। उसकी भी चूत परबहुत बाल थे। अब मैं उसकी चूत के दानेको सहला रहा था, बीच बीच मैं उसके छेद मेंउंगली भी डाल देता था। उसकी चूतरजनी की तरह कसी हुई नहीं थी। तो उसनेबताया कि वो चुपचाप मोमबत्ती अन्दरडालती थी।थोड़ी देर बाद उसकी चूत में से पानी निकलनेलगा। अब उसने मुझसे कहा कि उसकी चूतको अब लंड की जरुरत है।राधा ने अपनी सलवार और नीची कर दी औरअब मैं उसके ऊपर था और अपना लंडउसकी चूत पर रगड़ रहा था लेकिन वो बहुतही उतावली हो रही थी चुदने के लिए !मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला तो उसकेमुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह की आवाजनिकली और मैं उसको लगातार चोदने मेंलगा हुआ था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई औरमैंने भी अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़दिया। फिर हम लोगों ने अपने कपड़े सही कियेऔर बातें करने लगे। रात के तीन बज चुके थे।अचानक रजनी ने करवट बदली औरउसका एक पैर मेरे ऊपर था वो भी बहुत गरमहो रही थी। मैंने फिर रजनी की चूतको सहलाना शुरू कर दिया।तब राधा ने कहा- मैं तुझे रजनी की चूतभी दिलवाऊंगी।अब तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न था। थोड़ी देरतक हम लोग चूमा-चाटी करके सो गए।सुबह राधा ने मुझे कहा- मैं रजनी को दोपहर मेंऊपर के कमरे में ले आऊअगी और तुम कमरे मेंछुप जाना। जब मैं इशारा करूं तो तुम बाहरनिकल आना !वही हुआ। दोपहर में मैं कमरे में छुपगया तो वो दोनों कपड़े बदलने लगी। यह सबराधा का नाटक था।उसने रजनी को कहा- हमें कहीं जाना हैइसीलिए ऊपर कमरे में कपड़े बदल ले !जब रजनी ने अपने कपड़े उतारे तो मैंउसका बदन देखकर दंग रह गया।उसका शरीर तो मानो एकदम मक्खन की तरहलग रहा था। वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी मेंही थी।तभी राधा ने उसकी एक चूची को दबा किया।इस पर उसने भी राधा की दोनों चूचियां मसलदी। राधा तो यही चाहती थी कि रजनी यह सबकरे।अब वो दोनों एक दूसरे के स्तनदबा रही थी कि तभी राधा नेरजनी की पैन्टी उतार दी और खुदभी नंगी हो गई। अब वो दोनों एक दूसरे की चूतमें ऊँगली डाल रही थी।तभी रजनी ने कहा- काश ! यहाँ कोईलड़का होता तो कितने मजे आते !तो राधा ने मुझे इशारा किया तो मैं बाहर आगया। मुझे वह देखकर रजनी को शर्म आनेलगी और अपनी चूत को अपने हाथों से छुपानेलगी। लेकिन तब तक वो मेरी बाहों में थी औरमैं उसको गालों और होंठों को चूम रहा था।मेरा एक हाथ रजनी के वक्ष पर था औरदूसरा उसकी चूत पर !उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैं समझगया कि वो चुदाने के लिए तैयार है।अब मैंने उसको बेड पर लिटाया औरउसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा। फिर जैसेही मैंने अपने लंडको झटका दिया तो वो थोड़ा सा उसकी चूत मेंचला गया। वो रोने लगी और बोली- प्लीज,बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा है !मैं उसकी एक नहीं सुन रहा था। थोड़ी देर मेंमेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। मैं बिल्कुलशांत था ताकि उसका दर्द कुछ कम हो जाये।जब वो कुछ शांत हुई तो मैंनेउसको चोदना शुरू किया। उसे भी अबअच्छा लग रहा था। राधा भी अपनी चूत मेंउंगली डाल के शांत हो गई थी।थोड़ी देर में मैंने वीर्य से उसकी चूत भरदी थी। जब मैंने देखा तो वहाँ पर खूनपड़ा था और रजनी की चूत भी खून से लालथी।राधा ने बाद में यह सब साफ किया।फिर जब भी मौका मिलता तो मैं अपनी बहनराधा की चुदाई करता।2-3 दिन में रजनी अपने घरजा चुकी थी लेकिन उसको मैंने 3-4 बार चोदलिया था।हम लोग भी अपने घर पर आ गए। राधा औरमेरा चुदाई का सिलसिला आज भी है।आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी?

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