Sunday, 17 November 2013
ज़हाज में दीदी की चुदाईबात उन दिनों की है जब मैं कोलकाता में एकआर्ट कॉलेज में पढ़ता था। मेरे साथसंपा दीदी पढ़ती थी जो मुझसे एक सालसीनियर थी।अंडमान आइलैंड से हम दोनों ही थे हमारेकॉलेज में, इस लिए संपा दीदी मुझेअपनी भाई की तरह मानती थी।गर्मियों की छुट्टी शुरू होनेवाली थी तो दीदी ने कहा- संजय चलो इसबार हम दोनों शिप (जहाज) से अंडमानजायेंगे !मैंने कहा - ठीक है दीदी मैं टिकेट ले लूँगा।और फिर हम लोग निर्धारित दिन में जहाज मेंचढ़ गए।कोलकाता से अंडमान आने के लिए ४ दिनलगते है। मैंने एक ही केबिन के टिकेट लिए थे।जहाज में चढ़ कर हमने खिड़की में सेदेखा कि शाम को ५.०० बजे जहाज बन्दर सेछूटा और फिर धीरे धीरेकोलकाता का खिदिरपुर डॉक हमसे दूरहोता जा रहा था। शाम के वक्त लाइट बहुतसुंदर दिख रही थी।तभी दीदी ने कहा- भाई देखो कितनी सुंदरदृश्य नज़र आ रहा है, इस सीन का लैंड स्केपबना सकते है।मैंने भी हाँ में हामी भरी। वक्त कटता गया,शाम के ७.०० बजे डिनर होता है जहाज में,इसलिए हम ७.३० तक डिनर खाकर अपनेकेबिन में आ गए। दीदी ने कहा- संजय ! इसकेबिन में तो चार सीट हैं फिर हम दोनों केअलावा और किसी को इस केबिन का टिकेटनहीं मिला क्या?मैंने कहा- दीदी शायद जहाजखाली जा रहा है, इसलिए जहाज में लोगभी कम नज़र आ रहे हैं।थोड़ी देर की खामोशी के बाद दीदी बोली-भाई इतनी जल्दी तो नींद नहीं आने वाली !चलो कपड़े बदल लेते हैं और फिर हम एकदूसरे के स्केच बनाते हैं। मैंने भी हाँ कहा औरबाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक नेक्कर औरबनियान पहनकर बेड में बैठ गया।दीदी ने कहा- दरवाजा बंद कर दो।और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक स्कर्टऔर हल्का सा टाप पहन कर बाहर आई। मैंदेखता रह गया कि दीदी कितनी सुंदर लगरही हैं, इससे पहले दीदी को कभी इन कपड़ो मेंनहीं देखा था।दीदी को पता चला तो बोली - संजय !क्या देख रहे हो ? तुमको ठीक से मेरी फिगरदिखाई दे इसलिए ही इन कपड़ो को पहना हैताकि तुमको मेरी स्केच बनने कोई परेशानी नहो !फिर हम दोनों एक दूसरे के स्केच बनाने लगे।मेरी नज़र तो बार बार संपा दीदी की छाती परजाकर रुक जाती थी और मेरे लिए अपनेलण्ड को हाफ पैन्ट में छुपाना मेरे लिएमुश्किलहो रहा था क्योंकि दीदी की उभरी हुयी चुंचियाँटॉप के भीतर से झाँकने लगी थी।दीदी को शायद पता चला या नहीं अचानकदीदी ने कहा- भाई क्या हुआ तुमको?क्या देख रहे हो? क्या कुछ दिक्कत हो रही हैस्केच बनाने में या ठीक से दिख नहीं रही हैमेरी फिगर ? चलो तुम्हारे लिए औरथोड़ी एडजस्ट कर लेती हूँ, लकिन तुमभी अपना बनियान उतार कर बैठो, और फिरदीदी ने अपने स्कर्ट और टाप उतार दी।मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी। पर मैंचुपचाप से दीदी की ब्रा में बंद उनके बड़े बड़ेबूब्स को ही देख रहा था।तभी दीदी ने कहा- क्या हुआ संजय?जल्दी से अपनी बनियान उतार दो, मुझेभी तो तुम्हारा स्केच बनाने है। और इस तरहक्या देख रहे हो? ठीक से स्केच बनाओ !मैंने धीरे से अपने बनियान उतार दिया औरफिर स्केच बनने लगा, पर मेरा लण्डको हाफ-पैन्ट में छुप नहीं पा रहा था और मैंइधर उधर देखने लगा। शायददीदी को मेरा लण्ड हाफ-पैन्ट मेंखड़ा होता दिख गया।दीदी ने कहा- संजय ! क्या हुआ ? कभी इसतरह किसी लड़की को नहीं देखा क्या?तुम्हारी नियत तो ठीक है न ?मेरा झूठ पकड़ में आ रहा था मेरा लण्ड पैंट केऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।"क्या बात है..... तुम्हारा मुंह लाल क्यूँहो रहा है.......?"मेरी नजरों के सामने दीदी की ब्रा मेंउभरी हुयी चुंचियाँ के भीतर से झाँकने लगी।मेरी नजरें उनके स्तनों पर गड़ गयी। दीदी नेनीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा... औरमुझे गर्माते देख कर सीधे चोटकी......"संजय .... मेरी छाती में क्या देख रहेहो …झांक कर ?""हाँ... नही.... क्या....?" मैं बुरी तरह झेंप गया।"अच्छा.. अब मैं बताऊँ......कि क्या देख रहेहो तुम....." मैं एकदम से शरमा गया।"दीदी ... वो...नही....सो.... सॉरी...""क्या सॉरी..... एक तो चोरी...फिर सॉरी.......""दीदी .... अच्छी लग रही है देखनेमें .....सॉरी कहा न "मैं "हाँ... नही.... क्या....?" मैं बुरी तरह झेंपगया।"अच्छा.. अब मैं बताऊँ......कि क्या देख रहेहो तुम....." मैं एकदम से शरमा गया।"दीदी ... वो...नही....सो.... सॉरी...""क्या सॉरी..... एक तो चोरी...फिर सॉरी.......""दीदी ... अच्छी लग रही थी.....सॉरी कहा न "दीदी मेरे पाइंट पर से लण्ड के उभार को देखरही थी। मैंने ऊपर हाथ रख लिया।"नहीं देखो... इधर.. " मैं शरमा गया।दीदी मुस्कुरा उठी।"तो कान पकड़ो........"मैने अपने कान पकड़ लिए...... "बस...ना..."हाथ हटाने पर लण्ड का उभार फिर से दिखनेलगा। वो हंस पड़ी।"नहीं देखो... इधर.. " मैं शरमा गया।वो मुस्कुरा उठी।अब मुझे समझ में आगया था कि खुला निमंत्रण है। मेरा लण्डका पूरा आकार तक दिखने लगा था। मैं उठकर दीदी के पास आ गया। मैंने उनके कंधे परहाथ रखा और कहा-"दीदी .....तुम्हारेभी तो उभार हैं...... एक बारदिखा दो.....न ...प्लीज़ !"मैंने दीदी की पूरे बदन को देखा और फिरअचानक ही ...... दीदी को बिस्तर पर चितलिटा दिया और उनकी पीठ पर सवारहो गया. वो कुछ कर पाती, उनके पहले मैंनेउसको जकड़ लिया. मेरे लण्ड का जोर उनकेचूतड़ों पर महसूस होने लगा था।दीदी हलके से चीखी .."संजू ..... ये क्या कररहे हो ...?""दीदी ...मुझसे अब नहीं रहा जाता है ....!"मैंने तुंरत ही उनके होंट पर अपने होंट रखदिए। मुझे लगा कि शायद दीदी को मजा आनेलगा था।मैंने उनके भारी स्तनों को पकड़ लिया औरस्तनों को मसलना चालू कर दिया।वो सिमटी जा रही थी। पर मैंने हाथों से उनकेउभारों को मसलना जारी रखा। वो अपनेको बचाती भी रही...पर मुझे रोका भी नहीं।जब मैंने उनके उभारों को अच्छी तरह सेदबा लिया तब उसने मुझे पीछे की ओरधक्का दे दिया और कहा -"बहुत बेशरमहो गए हो...."उनके हाथ से पेंसिल नीचे गिर गयी। वो जैसेही उठ कर पेंसिल उठाने को झुकी, मैंने फिर सेउनके स्तनों पर कब्जा कर लिया।"क्या हुआ.... अब बस करो ....छोड़ दो न .....ये मत करो .... संजू .....हटो न ..?"" अरे ..... हट जा न ...... हटो संजय ...""मना मत करो दीदी !""देखो मैं चिल्ला पडूँगी .."'नहीं नहीं ...ऐसा मत करना ....... दीदी ...प्लीज़ एक बार देखने दो न ...!"मैंने दीदी के नरम नरम गोल चूतड़ों को हाथ सेसहला दिया। गोलाइयां सहलाते हुएअपना हाथ दोनों फाकों की दरार मेंघुसा दिया और फिर अपनी उंगली घुसा करउनकी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझेबहुत आनंद आ रहा था। दीदी वैसेही झुकी रही। अब मेरे हाथ उनकी चूतकी तरफ़ बढ गए।वो सिहर उठी। जैसे ही उनकी चूत पैन्टी केऊपर से दबी... चूत का गीलापन मेरे हाथ मेंलग गया। अब मैंने उनकी चूत को भींचदिया पर जल्दी से हाथ हटा दिया। औरदीदी सीधी खड़ी हो गयी।मैं मुस्कुराया "दीदी .. मज़ा आ गया.... तुम्हेंकैसा लगा...?""अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो....स्केच नहीं बनाने क्या...?"दीदी भी मुस्कुरा कर कहा।मैंने कहा- नहीं दीदी प्लीज़ मुझे अभी कुछऔर करना है ..... और मैंनेदीदी को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया औरउनकी पीठ के ऊपर फिर से बैठ गया और मैंनेअपना नेक्कर उतार दिया औरदीदी की पैन्टी भी उतार दी।अब मैं और दीदी नीचे से नंगे हो गए थे। मैंनेफिर अपने लण्ड को उनके चूतड़ों पर दबाया,दीदी ने भी चूतड़ों को ढीला छोड़ दिया ...औरमेरा लण्ड उनकी गांड के छेद से टकरा गया।दीदी ने फिर कहा-" अब बस करो ....छोड़दो न ..... ये मत करो .... संजू .....हटो न ...""आह संजू ... मत करो ...न ......देखो तुमने ...क्या किया ?""दीदी ..कुछ मत बोलो ...आज मैं तुम्हे छोड़नेवाला नहीं .... मेरी अपनी इच्छा जरूरपूरी करूँगा !"मुझे तो आनंद आ रहा था ... मैंने अपने लण्डको दीदी की गांड के छेद से रगड़ना शुरू किया,दीदी चुप रही।फिर अचानक मैंने दीदी को सीधा कर दिया ...और अपना लण्ड उनको दिखाया ..."देखो नदीदी ... अपनी गांड से इसका क्या हालकिया है तुमने..."उसने कहा .."देख संजय ...मैं हाथ जोड़ती हूँ ...मुझे छोड़ दे अब ... प्लीज़ .."" दीदी ...सॉरी .... ये मेरे बस में नहीं है अब ......मैं अब पूरा ही मजा लूँगा ..... तुमने मुझे बहुततड़पाया है .."मैंने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए, उनके बूब्सको देख कर मेरा लण्ड ज़ोर ज़ोर से झटकेखाने लगा तब सबसे पहले मैंने उनके निप्पलको चूपा। उनके निप्पल भी बड़े सख्त हो रखेथे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आरहा था।फिर मैं उनके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोरज़ोर से दबाने लगा मेरे इस तरह करने सेवो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंनेउनकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बालनहीं थे और उनकी चूत बहुत मस्त लगरही थी। उनकी चूत को देख कर मेरे मुंह मेंपानी आ गया और मैं उनकी चूत को चाटनेलगा। दीदी ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी- आ आआ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगीथोड़ी देर तक उनकी चूत चाटने के बाद मैंनेदेखा कि वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैंउसको और गरम करना चाहता था इसलिएअब मैं अपने लण्ड को उनके पूरे बदन परघुमाने लगा, पहले उनके चेहरे पर अपने लण्डको लगाया फिर उनकी गर्दन पर, फिर उनकेबूब्स पर, उनके निप्पल पर, उनके बूब्स केबीच में अच्छी तरह मैं अपने लण्डको लगा रहा था। मेरे लण्ड से जो पानी निकलरहा था वो भी उनके पूरे बदन पर लगरहा था जिससे वो और ज़्यादा गरमहो रही थी। मैंने अपने लण्ड को उनके बूब्सके बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरेलण्ड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर सेदबाने लगी।८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लण्ड देखतेही उनके होश उड़ गए और वो कहनेलगी कि नहीं संजू प्लीज़ मेरे साथ वो मतकरना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- डरो मतदीदी मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा।मगर वो मान ही नहीं रही थी।तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इसहथियार को अपने मुंह में ले सकती हो?उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बारबार प्लीज़ कहने पर वो मान गई। अब वो मेरेलण्ड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत मेंथा। उससे खूबसूरत लड़की को मैंनेअपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था औरवो मेरा लण्ड चूस रही थी।थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाईका काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आरहा था। फिर क्या था मैंने अपना सारा मालदीदी की मुँह में ही डाल दिया। दीदी को शायदख़राब लगा और उन्हें उलटी आने लगी।मैं जल्दी से उनकी चूत पर झुक गया। मादकसी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठउनकी चूत पर रख दिये।वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उनकी चूतके होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होलेमैं उनकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा।वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंनेअपनी जीभ की नोक उनकी चूत के छेद मेडाली और अन्दर तक ले गया।वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़नेलगा। उनकी सिसकियां बढ़ने लगी। अबवो सारे बहाने छोड़ कर दोनों हाथो से मेरे सरको अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपनेलगी और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया औरमैं उसका सारा पानी पी गया।मैंने देखा कि वो हांफ रही है ओर मेरी तरफ़देख रही है, मैंने उनके कान के पास जाकरफुसफुसा के कहा- दीदी अब बोलो तुम्हेकैसा लगा ?दीदी ने आँख खोली और गहरी साँस ली। मैंउनके ऊपर से नीचे आ गया, दीदी तुंरतबिस्तर पर से नीचे आ गयी। अब दीदी ने मुझेबेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लेटगई और मुस्कराया......उसने मुझे चूमना चालूकर दिया। एक हाथ नीचे ला करमेरा मुरझाया हुआ लण्ड पकड़ लिया औरउसे हिलाने लगी, मसलने लगी.......लण्ड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा.दीदी अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरेमुठ मारने लगी। कुछ ही देर में मेरा लण्डचोदने के लिए तैयार था। दीदी मेरे ऊपर लेटगयी, अपनी दोनों टांगे फैला दी, लण्डका स्पर्श चूत के आस पास लग रहा था। मैंनेउनके होंट अपने होटों में दबा लिए। हमदोनों अपने आप को हिला कर लण्ड और चूतको सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे।उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया।मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी।अचानक मेरे अन्दर आनंदकी तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी। मेरा लण्डफिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिएउतावला हो गया। मैंने बाजी पलटी औरदीदी को नीचे लिटा दिया और कहा- दीदी एकबार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुतमज़ा आएगा।वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बारथोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गईऔर मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल करअपने लण्ड और उनकी चूत पर लगाया औरअपना काम धीरे धीरे शुरू किया।उसे बहुत दर्द हो रहा था और मेर लण्डउनकी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुसगया। उनके मुंह से एकमीठी सी सिसकारी निकल पड़ी..."संजू .... अआह हह हह हह..... सी ई स स स ई एई....!"एक धक्का मारा मेरा आधा लण्ड उनकी चूतमें चला गया। वोह चिल्लाई- आआआआअहह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह . ..,संजू .......धीरे !उनके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड उनकी चूतमें पेल दिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा,मैंने महसूस किया कि दर्द के मारे उनकेआँखों से आंसू निकल आए थे। मैंने उनकेगालो को चूम कर पूछा," ज्यादा दर्दहो रहा है..?"उसने जवाब दिया "इस दर्द को पाने के लिएहर लड़की जवान होती है.. इस दर्द को पाएबिना हर यौवन अधूरा है !"मैं उनके इस जवाब पे बसमुस्कुरा ही पाया क्योंकि मेरे पास बोलनेको कुछ था ही नही..अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।वो मुझ में लिपटी हुई थी...और मैं उसे चूमरहा था...वो मेरे नीचे थी और अपनेपैरों को मेरे कमर के इर्द गिर्द लपेटे हुएथी मानो कोई सर्पिनी चंदन के पेड़ को अपनेकुंडली से कसी हो..अब मैंने धीरे धीरेअपनी रफ़्तार तेज कर दी... पूरे केबिन मेंमादक माहौल था.....हमारी सिसकारियां ज़हाज के इस केबिन मेंऐसे गूंज रही थी मानो जलजला आने से पहलेबदल गरज रहे हो...वो जलजला जल्द ही आया जब मैं अपनेकमर की हरकतों की वजह से चरम सीमा पेपहुँचने वाला था .. उधर दीदी भी मुझे बोलरही थी...".. संजू प्लीज और जोर से..औरजोर से ...मेरे शरीर में अजीब सी हलचलहो रही है "... मैं समझ गया कि वो भी चरमसीमा पे है...इस पर मैंने अपनी रफ्तारकाफी तेज कर दी। देखते ही देखते हम उफानपर थे और सैलाब बस फूटनेही वाला था कि मैंने अपना लण्ड बाहरनिकला और मानो मेरे लण्ड से कोईझरना फ़ूट पड़ा हो.. मैं वापस उनके बाँहों मेंनिढाल हो गया ..बहुत देर बाद जब मैं उठा औरदेखा कि संपा दीदी की जांघों पर खून गिरा हैतब मैं समझ गया कि वो अभी तक अन्छुईथी .. मुझे ये देख कर अपने किस्मत पर गर्वहो रहा था और साथ ही साथ दीदी के बारे मेंसोचने लगा कि ..ऐसी लड़की नहीं थी कि किसी को भी अपनाशरीर सौंप दे .. इतने दिनों से अकेलेकोलकाता में रहने के बाद भी वो आज तकअन्छुई थी...मैंने पास में पड़े तौलिए को उठाया और उनकेबूर के ऊपर लगे खून को साफ़ करने लगा। जबखून साफ़ हुआ तो मैंने एक बात गौर की औरमुस्कुराने लगा।दीदी ने मुझ से पूछा कि"... तुम क्या सोच करमुस्कुरा रहे हो ..?"मैंने उनके बिल्कुल बिना बाल के गुलाबकी पंखुड़ियों सी योनि-लबों को चूम कर केबोला... " दीदी सच बताऊँ तो .. मैंनेतुम्हारी बूर अभी तक नहीं देखी थी.. औरसाफ़ करते वक्त अभी ही देखा....!"और हम दोनों हंस पड़े..उस दिन से अगले ४ दिन तक आप समझही सकते है कि हमारे सैलाब में कितनी बारउफान आई होगी.. जब तक हम अंडमाननहीं पहुँच
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